केंद्रिय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि व्यवसाय करने की लागत में कटौती जैसे मुद्दों पर विवरण प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के तहत एक समिति स्थापित की जाएगी। इस समिति में केंद्र राज्य और प्राइवेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया पहल को और बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी की उपलब्धता पर जोर दिया जाएगा।
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मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "एक समिति बनाई जाएगी जो केंद्र और राज्यों के सभी मुद्दों की विस्तार से जांच करेगी। इसमें विभिन्न मंत्रालय शामिल होंगे, प्राइवेट खिलाड़ी भी शामिल होंगे जो उन क्षेत्रों के बारे में जानकारी देंगे जहां निर्यात क्षमता अधिक है।"
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने के लिए छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को कवर करने वाले मिशन की घोषणा की। पांच क्षेत्रों पर फोकस किया गया है, जिसमें व्यापार करने में लागत, भविष्य में मांग वाली नौकरियों के लिए कार्यबल, गतिशील एमएसएमई क्षेत्र, प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद शामिल हैं।
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "हम इसके त्वरित कार्यान्वयन के लिए काम करेंगे। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के लिए घोषित कदमों से छोटे शहरों में उद्यमियों को मदद मिलेगी। हम इस स्टार्टअप्स पर ध्यान केंद्रित करेंगे।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी करीब 16-17 फीसदी है और सरकार इस हिस्सेदारी को बढ़ाने पर विचार कर रही है।