कोयला मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कोयला उत्पादन बढ़कर 15.57 मिलयन टन पहुंच गया। इसमें 16.39 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और भारत के औद्योगिक विकास को समर्थन देने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
कैप्टिव और कॉमर्शियल कोयला खदानों से उत्पादन में 16.39 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। कोयला मंत्रालय के अनुसार जून 2025 में कोयला प्रेषण 17.31 मीट्रिक टन दर्ज किया गया। पिछले साल की तुलना में कोयला प्रेषण में 13.03 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कोयला प्रेषण का मतलब होता है कि खनन के बाद कोयले को उपभोक्ताओं तक भेजना। इसमें आमतौर पर कोयले को कोयला खदानों से बिजली संयंत्रों, इस्पात कारखानों, सीमेंट कंपनियों या अन्य औद्योगिक इकाइयों तक ट्रांसपोर्ट करना शामिल होता है।
कोयला उत्पादन 15.57 मिलियन टन तर पहुंचा
ये आंकड़े कोयला क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन का संकेत देते हैं। यह देश भर में प्रमुख उद्योगों की ऊर्जा और कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के दौरान कोयला उत्पादन 15.57 मिलयन टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि बेहतर परिचालन दक्षता और खनन क्षमताओं के बेहतर उपयोग का परिणाम है। कोयला मंत्रालय के जारी ग्राफ में पहली तिमाही के अंत में पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ है। उत्पादन और प्रेषण दोनों के आंकड़ों साल दर साल बढ़ रहे हैं।
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नई खदानों को मिली अनुमति
जून 2025 में कोयला मंत्रालय ने उत्कल-ए खदान को पीक रेटेड कैपेसिटी 25 मिलियन टन के साथ उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी। इसके अलावा ही तीन और कोयला ब्लॉकों पर आदेश जारी किए गए, जिससे आबंटित खदानों की कुल संख्या 200 से अधिक हो गई है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
ब्लॉक आवंटन में इस बढ़त से बिजली उत्पादन, इस्पात विनिर्माण और सीमेंट उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। यह वृद्धि घरेलू कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता कम करने और भारत के औद्योगिक विकास को समर्थन देने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। कोयला क्षेत्र को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।