क्लाउडफ्लेयर में आई तकनीकी खराबी से दुनियाभर में कई वेबसाइटें प्रभावित हुईं, जिनमें कैनवा और डाउनडिटेक्टर जैसे प्लेटफॉर्म शामिल रहे। इसका असर भारत में भी दिखा और जेरोधा, ग्रो जैसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की सेवाएं कुछ समय के लिए बाधित रहीं। बाद में क्लाउडफ्लेयर ने डैशबोर्ड से जुड़ी API समस्या ठीक करने का बयान जारी किया।
क्लाउडफ्लेयर में शुक्रवार को आई बड़ी तकनीकी खराबी के कारण दुनियाभर में कई वेबसाइटों की सेवाएं बाधित हो गईं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूजर्स ने आउटेज की शिकायतों की बाढ़ ला दी। इसमें डिजाइन प्लेटफॉर्म कैनवा और ट्रैकिंग साइट डाउनडिटेक्टर समेत कई लोकप्रिय सेवाएं कुछ समय के लिए ठप रहीं।
अमेरिका स्थित क्लाउडफ्लेयर के आउटेज का असर भारत में भी दिखा। घरेलू ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जेरोधा, ग्रो और एंजल वन की सेवाएं भी प्रभावित रहीं, जबकि रिपोर्ट्स के अनुसार यह दिक्कत मेंटेनेंस के चलते उत्पन्न हुई। बाद में जेरोधा ने सूचना दी कि उसकी काइट ट्रेडिंग सेवा अब पूरी तरह बहाल कर दी गई है। कंपनी ने सामान्य ट्रेडिंग शुरू होने की पुष्टि के साथ असुविधा के लिए खेद जताया।
क्लाउडफ्लेयर ने डैशबोर्ड संबंधी समस्या को किया ठीक
क्लाउडफ्लेयर ने बयान जारी कर कहा कि उसने डैशबोर्ड से जुड़े एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) की समस्या को ठीक कर लिया है। तकनीकी दिक्कत का असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखाई दिया, जो प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 4.5% तक गिर गए। यह एक महीने में दूसरी बड़ी घटना है। नवंबर में भी क्लाउडफ्लेयर की खराबी से स्पॉटिफाई, चैटजीपीटी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' जैसी सेवाएं प्रभावित हुई थीं। इस बीच, सोशल मीडिया पर यूजर्स का आक्रोश झलका। कई लोगों ने कामकाज रुकने और बार-बार तकनीकी समस्याओं पर नाराजगी जताई, साथ ही कंपनी से स्थायी समाधान की मांग की।
क्लाउडफ्लेयर क्या है?
क्लाउडफ्लेयर दुनिया की प्रमुख इंटरनेट अवसंरचना कंपनियों में से एक है। यह वेबसाइटों की स्पीड बढ़ाने और उन्हें साइबर हमलों से सुरक्षित रखने का काम करती है। यह उपयोगकर्ता और वेबसाइट के बीच एक सुरक्षा ढाल की तरह काम करती है। चूंकि लाखों कंपनियां इसके नेटवर्क पर निर्भर हैं, इसलिए इसमें आई गड़बड़ी से कई असंबंधित वेबसाइटें भी एक साथ प्रभावित हो जाती हैं।