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Global Manufacturing: सीआईआई ने कहा- भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए औद्योगिक भूमि सुधार जरूरी

Sun, 19 Apr 2026 03:32 PM IST
Pavan बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, 'मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के तहत भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षाओं को तब तक साकार नहीं किया जा सकता जब तक कि औद्योगिक भूमि पूर्वानुमानित, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो जाए।'
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भारतीय उद्योग परिसंघ - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए किफायती और पारदर्शी तरीके से उद्योगों की औद्योगिकी भूमि तक पहुंच जरूरी है। इंडस्ट्री बॉडी ने अपनी रिपोर्ट 'सीआईआई लैंड मिशन: फ्रेमवर्क टू रिफॉर्म इंडस्ट्रियल लैंड मैनेजमेंट इन इंडिया' में औद्योगिक भूमि पारिस्थितिकी तंत्र में संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। 
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सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, 'मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के तहत भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षाओं को तब तक साकार नहीं किया जा सकता जब तक कि औद्योगिक भूमि पूर्वानुमानित, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो जाए।' उन्होंने कहा, 'सीआईआई लैंड मिशन एक व्यावहारिक, कार्यान्वयन केंद्रीय ढांचा प्रदान करता है जो सामाजिक सुरक्षा उपायों का सम्मान करते हुए भूमि मूल्य श्रृंखला में समय दक्षता, पूर्वानुमान और समन्वय को बढ़ाता है।'
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औद्योगिक भूमि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद के लिए एक मूलभूत संसाधन बनी हुई है। हालांकि, विभिन्न राज्यों में वर्तमान परिदृश्य खंडित प्रक्रियाओं, जटिल नियामक व्यवस्था, अस्पष्ट भूमि स्वामित्व, विलंबित कब्जे और आवंटित भूखंडों के अल्पउपयोग से ग्रस्त है। रिपोर्ट में बताया गया कि ये चुनौतियां पूंजी की लागत को काफी बढ़ा देती हैं, परियोजनाओं के चालू होने में देरी करती हैं और निवेशकों के विश्वास को कम करती हैं।

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यह रिपोर्ट औद्योगिक भूमि के संपूर्ण जीवनचक्र का विस्तृत मूल्यांकन करती है, जिसमें भूमि खोज और पहचान, आवेदन, आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू), स्वामित्व और उचित जांच-पड़ताल सत्यापन, अधिग्रहण, भौतिक कब्जा, आवंटन के बाद का उपयोग और संस्थागत क्षमता शामिल हैं। रिपोर्ट की एक प्रमुख सिफारिश एकीकृत, जीआईएस-सक्षम राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना है, जो भूमि की उपलब्धता, जोनिंग स्थिति, उपयोगिताओं, पर्यावरणीय बाधाओं, भार और स्वामित्व की स्पष्टता पर वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करे।

ऐसा प्लेटफॉर्म पारदर्शिता को काफी हद तक बढ़ाएगा और सूचित, त्वरित निवेश निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा। साथ ही, इस रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि आवेदनों के लिए एक पूर्णतः एकीकृत डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली की भी वकालत की गई है।

-इनपुट आईएएनएस
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