भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष आर दिनेश ने सुझाव दिया कि सरकार उन उत्पादन से जुड़ी योजनाओं (पीएलआई) के अनुरूप रोजगार प्रोत्साहन योजना लेकर आए, जिन्हें उसने कई क्षेत्रों के लिए शुरू किया है। उन्होंने कहा कि रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना न केवल नौकरियां पैदा करेगी बल्कि पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, आतिथ्य और रसद जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ने में मदद करेगी।
सीआईआई प्रमुख ने कहा, हम रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना का सुझाव दे रहे हैं, खासतौर पर पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और रसद जैसे उच्च रोजगार पैदा करने वाले कुछ क्षेत्रों का समर्थन करने के लिए। चुनावी मौसम में दिनेश ने कहा कहा कि भारत के नीति घोषणापत्र में बड़ा सुधार होना चाहिए। भारत को मौटे तौर पर चार क्षेत्रों में बड़े सुधारों की जरूरत है- श्रम सुधार, कृषि सुधार, लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) के क्षेत्र में सुधार और फिनटेक क्षेत्र में सुधार।
दिनेश ने कहा, कृषि और श्रम सुधारों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच व्यापक सहमति की जरूरत है। कृषि और श्रम क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधारों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच आम सहमति तक पहुंचने के लिए वस्तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटी काउंसिल) जैसी एक संस्था बनाई जानी चाहिए। यह संस्था इन सुधारों का उचित और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकता है।
उन्होंने कहा, आज हमारे पास एमएसएमई हैं। उन्होंने औपचारिक अर्थव्यवस्था, बैंकों और फिनटेक से फंडिंग तक बेहतर पहुंच मिलनी चाहिए। जरूरत इस बात की है कि आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को उनके समर्थन के लिए संस्थागत बनाया जा सकता है। ऐसा करने के लिए इसे एक रेटिंग एजेंसी के साथ गठजोड़ की आवश्यकता है। यह एमएसएमई के लिए रेटिंग को उपयुक्त बनाने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा, एमएसएमई की मुख्य चुनौती स्थिरता और हरित उर्चा में बदलाव के लिए धन प्राप्त करना है। इस मकसद के लिए एक कोष बनाया जाना चाहिए। दिनेश ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का तीन और छह फीसदी स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाना चाहिए।