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Sri Lanka Loan: श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन से जुड़ी बैठक से चीन ने काटी कन्नी, अप्रैल में हुआ था आयोजन

Fri, 09 Jun 2023 11:23 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sri Lanka Loan: श्रीलंका के लोन मुद्दे पर वाशिंगटन में हुई बैठक सफलतापूर्वक समाप्त हुई जिसमें सभी पक्ष एक आम सहमति पर पहुंच गए। यह वार्ता श्रीलंका और उसके लेनदारों के बीच एक व्यापक समझौते की दिशा में उठाया गया एक कदम था। पुनर्गठन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक समयसीमा निर्धारित की गई थी।
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श्रीलंका का झंडा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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वाशिंगटन में अप्रैल में श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन से संबंधित बैठक में चीन की अनुपस्थिति विकासशील देशों के सामने आने वाली ऋण समस्याओं के प्रति बीजिंग के दृष्टिकोण पर बढ़ती निराशा का संकेत देती है। ऋण पुनर्गठन बैठक के लिए चीनी प्रतिनिधिमंडल को दिया गया निमंत्रण, विशेष रूप से श्रीलंका के चीनी ऋणों पर चर्चा करने के लिए था, लेकिन चीन ने बैठक में भाग नहीं लेने का फैसला किया। चीन के इस रुख ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि वह ऋण वार्ता में शामिल होने का इच्छुक नहीं था। वाशिंगटन में हुई बैठक ने पेरिस क्लब, जापान और भारत के साथ ऋण पुनर्गठन वार्ता की शुरुआत को चह्नित किया। इस आयोजन का उद्देश्य श्रीलंका की ऋण वार्ता में नई गति लाना था, जो चीन और अन्य उधारदाताओं के बीच गतिरोध में फंस गया है।

बैठक में शामिल हुए पक्ष एक आम सहमति पर पहुंचे

डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक सफलतापूर्वक समाप्त हुई जिसमें सभी पक्ष एक आम सहमति पर पहुंच गए।  यह वार्ता श्रीलंका और उसके लेनदारों के बीच एक व्यापक समझौते की दिशा में उठाया गया एक कदम था। पुनर्गठन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक समयसीमा निर्धारित की गई थी।  आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक केंजी ओकामुरा ने कहा कि श्रीलंका गहरे ऋण संकट में है और श्रीलंका को संकट से बाहर निकलने के लिए जल्द ऋण समाधान की आवश्यकता है।  

आईएमएफ अधिकारी बोले- श्रीलंका की भलाई के लिए सभी लेनदार मिलकर निकालें समाधान

'डेली मिरर' की खबर के अनुसार, ओकामुरा ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि सभी आधिकारिक द्विपक्षीय लेनदार इसमें भाग ले सकते हैं और बातचीत सुचारू रूप से और तेजी से आगे बढ़ेगी। उनका मानना है कि संकट को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका सभी आधिकारिक लेनदारों का एक साथ आना और एक ऐसे समाधान पर बातचीत करना है जो दोनों पक्षों के हित में हो। इससे श्रीलंका को अपना कर्ज चुकाने और अपनी आर्थिक विकास योजनाओं के साथ आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी।  इसके अलावा, इससे लेनदारों को भी लाभ होगा, क्योंकि यह उन्हें नियमित भुगतान प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उनके हितों की रक्षा की जाए।

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