चीन के साथ जारी सीमा विवाद का असर भारत के निर्यात क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। चीन और हांगकांग के सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग ने भारतीय निर्यातकों के सामानों की कई खेप रोक ली है। निर्यातकों के संगठन फियो ने मामले में दखल के लिए वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान को पत्र लिखा है।
भारतीय निर्यात संगठन संघ (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने बृहस्पतिवार को बताया कि चेन्नई और मुंबई बंदगाह पर सीमा शुल्क विभाग के अधिकारी चीन से आयात होने वाले सामानों की खेप रोककर जांच कर रहे हैं। इससे खेप को मंजूरी मिलने में देरी हो रही है और आयात की लागत भी बढ़ रही है। कई निर्यातकों ने बताया है कि इसके जवाब में चीन और हांगकांग के कस्टम विभाग ने भी भारत से भेजे गए सामानों की खेप रोक ली है और उनकी गैरवाजिब जांच करा रहा है। उन्होंने वाणिज्य सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड से पूछा जाए कि क्या उसने अपने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अगर ऐसा आदेश नहीं दिया गया है, तो इसकी जानकारी चीन और हांगकांग को दी जाए। सराफ ने कहा, मौजूदा परिस्थिति से न सिर्फ आयात की लागत बढ़ रही, बल्कि हमारे निर्यातकों पर भी असर हो रहा है।
2020-21 में 12 फीसदी घटेगा निर्यात
फियो ने कहा है कि अगर मौजूदा हालात में सुधार होता है, तो भी चालू वित्तवर्ष में निर्यात 10-12 फीसदी कम रह सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक मांग और खपत में कमी आना है। रत्न और आभूषण, वस्त्र, जूता-चप्पल, हैंडीक्राफ्ट और कारपेट उद्योग पर सबसे ज्यादा की आशंका है। शुरुआती चुनौतियों से हमें निर्यात में 20 फीसदी की गिरावट का अनुमान था, लेकिन दो पहले विश्व व्यापार संगठन की रिपोर्ट ने यह गिरावट 13 फीसदी बताई। हम ज्यादा उम्मीद तो नहीं करते, लेकिन अब यह 10-12 फीसदी के बीच रह सकता है। चीन के खिलाफ जारी भावनात्मक विरोध का असर भी पड़ेगा, जिसकी हमारे कुल आयात में 14 फीसदी हिस्सेदारी है।
सोलर उपकरणों पर लगाएंगे 40 फीसदी शुल्क : आरके सिंह
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बताया कि देश में आयात होने वाले सोलर उपकरणों पर इस साल 15-25 फीसदी सीमा शुल्क लगाया जाएगा, जिसे अगले साल बढ़ाकर 40 फीसदी तक ले जाएंगे। इससे पहले नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त से इन उत्पादों पर सीमा शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जो अभी शून्य शुल्क के दायरे में आते हैं। सोलर सेल पर 10-15 फीसदी सीमा शुल्क के अलावा 15 फीसदी बचाव शुल्क भी लगाया जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ेगा, क्योंकि अभी आयात होने वाले 90 फीसदी सोलर उपकरण चीन से ही आते हैं।