चीन के शीर्ष नेताओं ने इस सप्ताह अमेरिका के साथ हुई व्यापार वार्ता के बाद उन कंपनियों को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। यह कंपनियां बढ़े हुए अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुई हैं। हालांकि, उन्होंने किसी बड़े या निर्णायक कदम की घोषणा नहीं की, जिससे कारोबारी जगत और नीति नियोजकों के बीच असमंजस बना हुआ है।
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घरेलू व विदेशी व्यापार को बढ़ाने पर दिया गया जोर
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बंद कमरे में हुई इस बैठक की रिपोर्ट दी। इसमें बताया गया कि विदेशी व्यापार उद्यमों की सहायता करनी चाहिए जो बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वित्तीय सहायता को मजबूत करना चाहिए और घरेलू व विदेशी व्यापार के एकीकृत विकास को बढ़ावा देना चाहिए। इसमें निर्यात कर छूट और मुक्त व्यापार क्षेत्रों का जिक्र तो किया गया, लेकिन कोई अन्य विशिष्ट जानकारी नहीं दी गई।
व्यापार वार्ता के अनिश्चित परिणाम
स्वीडन के स्टॉकहोम में दो दिनों तक चली व्यापार वार्ता के अनिश्चित परिणाम के कारण, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। चीनी उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने कहा कि दोनों पक्ष उच्च टैरिफ की समयसीमा बढ़ाने पर काम करने पर सहमत हुए हैं। वहीं अमेरिकी पक्ष ने कहा कि इसे बढ़ाने पर चर्चा हुई है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।
अब ट्रंप लेंगे आखिरी फैसला
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने वार्ता के बाद बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फैसला लेंगे कि समझौते पर पहुंचने के लिए 12 अगस्त की समय सीमा को आगे बढ़ाया जाए या 90 दिनों से स्थगित टैरिफ को वापस उच्च स्तर पर जाने दिया जाए।
विश्लेषकों ने बेसेन्ट वार्ता को लेकर जताई थी उम्मीद
चीन ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है। कई विश्लेषकों को उम्मीद थी कि स्टॉकहोम वार्ता के परिणामस्वरूप वर्तमान टैरिफ स्तरों में विस्तार होगा। वर्तमान में चीनी वस्तुओं पर 30% का अमेरिकी टैरिफ और अमेरिकी उत्पादों पर 10% का चीनी टैरिफ है, जो अप्रैल में बढ़ाए गए तीन अंकों वाले प्रतिशत दरों से काफी कम है।