दुनियाभर में मौजूदा हालात के मद्देनजर लगभग सभी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की व्यवस्था शुरू की है। इससे कंपनियों की कार्यशैली में उम्मीद से ज्यादा बदलाव नजर आ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी इसे तरजीह दी है।
इसी विषय पर कराए गए अंतरराष्ट्रीय संस्था गार्टनर द्वारा एक सर्वे कराया गया। इसमें 74 फीसदी सीएफओ ने माना कि बिना ऑफिस आए काम करने का नुस्खा उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर परिणाम दे रहा है। इसलिए वे यह व्यवस्था स्थाई रूप से लागू करना चाहते हैं, ताकि ऑफिस खर्च कम कर सकें।
- 81 फीसदी सीएफओ ने तो यह भी कहा कि वे भविष्य में वर्क फ्रॉम होम के रूप में ही कर्मचारियों की भर्ती करें।
- 20 फीसदी सीएफओ का मानना है कि वर्क फ्रॉम होम से उनकी बिल्डिंग का खर्च और ट्रैवल एक्सपेंस में काफी बचत होगी।
- 71 फीसदी सीएफओ का यह भी मानना है कि इससे कारोबार की निरंतरता और उत्पादकता दोनों प्रभावित होगी।
स्थाई रूप से वर्क फ्रॉम होम की संभावनाएं तलाश रही कंपनियां
सर्वे में 317 सीएफओ शामिल थे। ज्यादातर ने माना कि कोरोना संक्रमण की यह स्थिति वर्चुअल दफ्तर की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। कुछ कंपनियां लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी स्थाई रूप से वर्क फ्रॉम होम की संभावनाएं तलाश रही हैं।
दिग्गज कंपनियां करवा रही हैं वर्क फ्रॉम होम
एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियां अमेरिका में अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम करवा रही हैं। ट्विटर और गूगल समेत कई कंपनियों ने कर्मचारियों से कहा है कि अगले आदेश तक इसी व्यवस्था में काम करते रहें। इस संदर्भ में माइक्रोसॉफ्ट ने सिएटल और सैन फ्रांसिस्को के बाद पूरे अमेरिका में घर से ही काम करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मामले मे युनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के शोधकर्ताओं ने लॉकडाउन में वर्क फ्रॉम होम का फायदा बताते हुए ट्वीट भी किया और अपनी एक रिसर्च का हवाला दिया, जिसमें 2018 में घर से काम करने के दौरान बिजली, ईंधन की कम खपत से पर्यावरण को होने वाले फायदे गिनाए गए थे।