अमेरिका की टैरिफ के कारण आने वाली चुनौतियां अगली एक या दो तिमाहियों में समाप्त हो जाएंगी। केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को यह दावा किया। उन्होंने निजी क्षेत्र से और अधिक कोशिश करने की अपील की क्योंकि देश अन्य दीर्घकालिक चुनौतियों से निपट रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के बारे में कोई भी विवरण देने से इनकार करते हुए शिक्षाविद से सलाहकार बने नागेश्वरन ने कहा कि इस समय विश्व स्तर पर चीजें बहुत अस्थिर हैं। भारत और अमेरिका के संबंध सहयोग से गतिरोध की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि मौजूदा स्थिति एक या दो तिमाहियों में सुधर जाएगी। मुझे नहीं लगता कि लंबे समय के परिदृश्य में भारत पर टैरिफ प्रभाव उतना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन थोड़े समय तक इसका कुछ प्रभाव पड़ेगा।"
उन्होंने कहा कि कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अधिक टैरिफ लगाने का फैसला क्यों किया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या यह ऑपरेशन सिंदूर का नतीजा है या इससे भी अधिक रणनीतिक बात है।
हालांकि, सीईए ने कहा कि टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बीच हमें अधिक "महत्वपूर्ण चुनौतियों" से अनजान नहीं रहना चाहिए। इन चुनौतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का प्रभाव, महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक देश पर निर्भरता और उनका प्रसंस्करण व आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना शामिल है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने मौजूदा परिस्थितियों के बीच निजी क्षेत्र से और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "क्योंकि हम इन दीर्घकालिक चुनौतियों से निपट रहे हैं।" सीईए ने वादा किया कि सार्वजनिक नीति चुनौतियों के बीच सुविधाकर्ता की भूमिका निभाएगी।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारतीय उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा, "आने वाले वर्षों में हमारे सामने आने वाली बड़ी रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए निजी क्षेत्र को भी बहुत कुछ सोचना होगा। निजी क्षेत्र को अगली तिमाही के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण के बारे में सोचना होगा। इसके कारण ही वर्तमान में हमारे सामने कई चुनौतियां आ रही हैं।" हालांकि, सीईए ने विषय पर और अधिक विस्तार से बात नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसंधान के लिए धन आवंटित किया है, अब निजी क्षेत्र को इस क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाना होगा।
सीईए ने कहा कि भारतीय युवा अत्यधिक स्क्रीन उपयोग, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन आदि के कारण शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इससे लोगों में चिंताएं और यहां तक कि आत्महत्या के विचार भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की मदद मांगी। उन्होंने वित्त वर्ष 2026 में निजी क्षेत्र की ओर से किए गए पूंजीगत व्यय का स्वागत किया और कहा कि अगले वर्ष फरवरी में जारी होने वाले आंकड़े इसकी पुष्टि करेंगे।
यूपीआई उपयोग के आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि खपत की स्थिति 'काफी अच्छी' है। शहरी खपत के बारे में बोलते हुए सीईए ने खेद जताया किया कि सेवाओं की खपत को दर्शाने के लिए कोई उचित डेटा स्रोत नहीं है। नागेश्वरन ने यह भी कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों की आय से जानकारी प्राप्त करना भी सही मापदंड नहीं हो सकता, क्योंकि खपत गैर-सूचीबद्ध क्षेत्र की ओर बढ़ रही है।
सीईए ने कहा कि अर्थव्यवस्था में समग्र संसाधन जुटाने में कोई कमी नहीं दिख रही है। उन्होंने सभी से बैंकों के ऋण वृद्धि, वाणिज्यिक पत्र जारी करने और आईपीओ के लिए धन जुटाने पर एक साथ ध्यान देने को कहा। चीन के बारे में नागेश्वरन ने कहा, "हमें सुरक्षा पहलू को भी समझना होगा और 100 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को सिर्फ़ संख्या से आगे देखना होगा।" समाधान के तौर पर, आयात के स्रोतों में विविधता लाने की ज़रूरत है और मुख्य आर्थिक सलाहकार ने ज़ोर देकर कहा कि इसमें निजी क्षेत्र की भूमिका होगी।
चीन का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि केवल एक देश ही महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति करता है। ये खनिज अर्धचालक व कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इनकी आपूर्ति 'गंभीर रूप से अस्थिर' है। उन्होंने कहा, "हम कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के बाद महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य आयातों के मामले में भी दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकते। नागेश्वरन ने कहा, "भारत के नीति निर्धारकों को यह तय करना होगा कि वे दूसरे देशों पर हमेशा निर्भर रहना चाहते हैं या फिर इससे बचने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"
सीईए ने कहा कि एआई श्रम विस्थापन का कारण बनेगा। उन्होंने एआई को अपनाने में सावधानी बरतने की वकालत की और कहा कि "हमें उन क्षेत्रों का चयन करना होगा जिनमें हम एआई को तैनात और उपयोग करने की अनुमति देते हैं। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हम ऐसा किस गति से करते हैं"। उन्होंने कहा कि अगले 10-12 वर्षों में प्रतिवर्ष कम से कम 80 लाख नए रोजगार सृजित करने की जरूरत है।