V Anantha Nageswaran: सीईए नागेश्वरन ने शुक्रवार को पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े 7.8 प्रतिशत रहने का एलान करते हुए कहा कि उच्च टैरिफ का असर थोड़े समय तक रहने की उम्मीद है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उम्मीद जतायी कि भारत-अमेरिका व्यापारिक मसलों को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं, और इसका जल्दी ही समाधान निकल सकता है। सीईए आगे क्या बोले? आइए विस्तार से जानते हैं।
मजबूत घरेलू मांग के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 6.3 से 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। हालांकि, अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण जीडीपी के अनुमानों में कुछ गिरावट का जोखिम भी है। यह कहना है सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का।
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सीईए नागेश्वरन ने शुक्रवार को पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े 7.8 प्रतिशत रहने का एलान करते हुए कहा कि उच्च टैरिफ का असर थोड़े समय तक रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका 25% दंडात्मक टैरिफ को हटाने और उसके बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं।
नागेश्वरन ने कहा, "पारस्परिक टैरिफ और दंडात्मक टैरिफ (अमेरिका की ओर से लगाए गए) के बावजूद, और पहली तिमाही की वृद्धि दर में लचीलापन देखने के बाद, हम चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 6.3-6.8 प्रतिशत पर बरकरार रख रहे हैं।"
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उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमान में कोई उल्लेखनीय गिरावट आने की आशंका नहीं है। जनवरी में संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 6.3-6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। नागेश्वरन ने उम्मीद जताते हुए कहा कि आने वाली तिमाहियों में मांग में वृद्धि बनी रहेगी, क्योंकि जीएसटी दर में कटौती की संभावना है। इसके अलावे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से भी उपभोग में तेजी आएगी।