आर्थिक मामलों पर कैबिनेट की समिति (सीसीईए) की ओर से सशक्त वैकल्पिक तंत्र ने शुक्रवार को पवन हंस में भारत सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने और प्रशासन नियंत्रण के स्थानांतरण के लिए स्टार9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड की सबसे ऊंची बोली को अनुमति दे दी। इस वैकल्पिक तंत्र में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण और ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हैं। पवन हंस में भारत सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी की है।
सरकारी हेलीकॉप्टर कंपनी पवन हंस इस समय गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। यह देश की इकलौती सरकारी हेलीकॉप्टर सेवा प्रदान करने वाली कंपनी है। तीन दशक से भी अधिक पुरानी इस कंपनी को वित्त वर्ष 2018-19 में लगभग 69 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसके बाद साल 2019-20 में भी कंपनी को लगभग 28 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा था। इसी के चलते सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है।
स्टार9 ने 211.34 करोड़ रुपये की लगाई बोली
इस संबंध में जारी एक बयान में कहा गया है कि पवन हंस का प्रबंधकीय नियंत्रण भी स्टार9 मोबिलिटी के ही पास रहेगा। पवन हंस की 51 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए आरक्षित मूल्य 199.92 करोड़ रुपये तय किया गया था। पवन हंस की बिक्री के लिए सरकार को तीन कंपनियों से बोलियां मिली थीं। इनमें से स्टार9 मोबिलिटी की ओर से 211.14 करोड़ रुपये की बोली लगाई गई थी, जिसके बाद वह सबसे बड़ा बोलीकर्ता बन गया।
बाकी दो बोलियां 181.05 करोड़ रुपये एवं 153.15 करोड़ रुपये की थीं। बता दें कि स्टार9 मोबिलिटी एक समूह है जिसमें बिग चार्टर प्राइवेट लिमिटेड, महाराजा एविएशन प्राइवेट लिमिटेड और अल्मास ग्लोबल ऑपरच्युनिटी फंड एसपीसी शामिल हैं। इसे लेकर वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि उचित विचार-विमर्श के बाद, मेसर्स स्टार9 मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय बोली को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
बता दें कि हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनी पवन हंस लिमिटेड केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रम ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन) का संयुक्त उद्यम है। इस कंपनी में दोनों की हिस्सेदारी 51:49 के अनुपात में है। सरकार की ओर से हिस्सेदारी बेचने को लेकर ओएनजीसी ने पहले ही कह दिया था कि वह रणनीतिक विनिवेश सौदे में चिह्नित सफल बोलीकर्ता को अपनी समूची हिस्सेदारी समान भाव व शर्तों पर दे देगी।