सार्वजनिक क्षेत्र के केनरा बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। बैंक का शुद्ध लाभ मामूली दो फीसदी बढ़कर 4,856 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक को 4,752 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। बेंगलुरु स्थित इस बैंक ने 27 जुलाई 2026 को अपनी नियामक फाइलिंग में यह जानकारी दी है।
बैंक की कुल आय जून तिमाही में बढ़कर 39,684 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष की जून तिमाही में यह आय 38,063 करोड़ रुपये थी। बैंक द्वारा अर्जित ब्याज आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह 31,003 करोड़ रुपये से बढ़कर 32,957 करोड़ रुपये हो गई है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान बैंक का परिचालन लाभ भी बढ़ा है। यह एक साल पहले की इसी तिमाही के 8,554 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,636 करोड़ रुपये हो गया है।
बैंक की संपत्ति गुणवत्ता कैसी रही?
केनरा बैंक की संपत्ति गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। जून तिमाही के अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) सकल अग्रिमों के 1.57 फीसदी पर आ गईं। एक साल पहले यह आंकड़ा 2.69 फीसदी था। इसी तरह, शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां या खराब ऋण भी कम हुए हैं। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 0.63 फीसदी से घटकर 0.36 फीसदी हो गए हैं। खराब ऋणों के लिए प्रावधान भी पहली तिमाही में कम होकर 1,399 करोड़ रुपये हो गए। पिछले साल की इसी अवधि में यह 1,845 करोड़ रुपये थे। यह सुधार बैंक के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
क्या प्रावधान कवरेज अनुपात में सुधार हुआ?
बैंक का प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) भी बेहतर हुआ है। यह पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अंत में 93.17 फीसदी से बढ़कर 94.76 फीसदी हो गया है। यह दर्शाता है कि बैंक ने अपने संभावित खराब ऋणों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए हैं। इससे बैंक की वित्तीय स्थिरता मजबूत होती है। हालांकि, परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) में गिरावट आई है। जून 2025 में यह 1.14 फीसदी था, जो जून 2026 में घटकर 1.04 फीसदी रह गया। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर बैंक को ध्यान देना होगा।
पूंजी पर्याप्तता अनुपात में क्या बदलाव आया?
केनरा बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात भी बढ़ा है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के 16.52 फीसदी से बढ़कर 17.17 फीसदी हो गया है। यह अनुपात बैंक की वित्तीय मजबूती और भविष्य के जोखिमों को संभालने की क्षमता को दर्शाता है। उच्च पूंजी पर्याप्तता अनुपात बैंक को अधिक सुरक्षित बनाता है। यह वृद्धि बैंक के मजबूत वित्तीय आधार को दर्शाती है। यह निवेशकों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।