वित्त मंत्रालय ने 2017-18 के दौरान विभिन्न मदों में आवंटित बजट से 1,157 करोड़ रुपये अधिक खर्च किये हैं। इन खर्चों के लिए संसद की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की मंगलवार को संसद में पेश रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाला आर्थिक मामलों का विभाग अतिरिक्त खर्च के वास्ते प्रावधान बढ़ाने के लिए विधायी स्वीकृति लेने में नाकाम रहा। कैग की रिपोर्ट में कहा गया, दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अनुदान सहायता, सब्सिडी और प्रमुख कार्यों के लिए नई सेवा के प्रावधान को बढ़ाने के लिए पहले संसद की अनुमति लेने की जरूरत होती है।
लोक लेखा समिति (पीएसी) ने अपनी 83वीं रिपोर्ट में 'अनुदान सहायता' और 'सब्सिडी' प्रावधान बढ़ाने के मामलों पर गंभीरता से विचार किया था। पीएसी ने कहा था कि ये गंभीर खामियां संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा दोषपूर्ण बजट अनुमान और वित्तीय नियमों में कमियां की तरफ इशारा करती हैं।