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कैग की नसीहत: गलत आयकर गणना से हुआ 12476 करोड़ का नुकसान, फूलप्रूफ आईटी सिस्टम व आकलन तंत्र बनाए सीबीडीटी

Wed, 22 Dec 2021 05:37 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

कैग ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा है कि 12,476.53 करोड़ रुपये के 356 बड़े मामलों का ऑडिट करने के बाद पता चला कि इसमें कई तरह की गलतियां हैं। सबसे ज्यादा चूक गणितीय गणना को लेकर हुई है।
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टैक्स (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कर आकलन में गलती और गणितीय गणना में चूक की वजह से आयकर विभाग को 12,476 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मंगलवार को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को ऐसी गलतियों से बचने के लिए फूलप्रूफ आईटी सिस्टम और आंतरिक नियंत्रण तंत्र बनाने का सुझाव दिया है।

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कैग ने संसद में पेश एक रिपोर्ट में कहा है कि 12,476.53 करोड़ रुपये के 356 बड़े मामलों का ऑडिट करने के बाद पता चला कि इसमें कई तरह की गलतियां हैं। सबसे ज्यादा चूक गणितीय गणना को लेकर हुई है, जिसमें आय और कर, लेवी का ब्याज, कारोबार या पूंजी का नुकसान, मूल्यह्वास, कर छूट व निर्यात में रियायत, कारोबारी खर्च के रूप में गलत अलाउंस, आय का सही आकलन न करने जैसी त्रुटियां हैं।

कैग ने बताया कि 356 बड़े मामलों में से अधिकतर में 38 तरह की सामान्य गलतियों की पहचान हुई, जिसमें 3,976.56 करोड़ के मामले शामिल थे। कर व सरचार्ज की गलत गणना, लेवी की गलत ब्याज दर और ज्यादा रिफंड जारी करना आयकर विभाग के आंतरिक नियंत्रण में कमी को दर्शाता है। इसे तत्काल दूर करने की जरूरत है।
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वित्त मंत्रालय ने दिए सुधार के निर्देश
कैग ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने ऑडिट में शामिल मामलों को सुधारने और तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि ऑडिट में सिर्फ कुछ ही मामलों को शामिल किया गया है। वास्तव में यह संख्या काफी बड़ी हो सकती है। लिहाजा सीबीडीटी को न सिर्फ अपने आकलन की समीक्षा करनी चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए मजबूत आईटी सिस्टम व आंतरिक नियंत्रण ढांचा तैयार करना होगा।

कंपनी कर घटा लेकिन आयकर में इजाफा
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019-20 में कंपनी कर वसूली 16.1 फीसदी घटकर 5.57 लाख करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में प्रत्यक्ष कर वसूली 4 फीसदी बढ़कर 4.80 लाख करोड़ पहुंच गई। हालांकि, कुल प्रत्यक्ष कर में 2018-19 के मुकाबले 7.6 फीसदी गिरावट आई और महज 10.51 लाख करोड़ की वसूली हुई। कुल टैक्स वसूली में प्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी पर भी असर पड़ा और 2018-19 के 54.7 फीसदी के मुकाबले 2019-20 में 52.3 फीसदी रह गई।

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