उन्नति फार्च्यून होल्डिंग का प्रमोटर अनिल 24 तक ईडी की हिरासत में
व्यभिचार के मामले में आरोपी को बरी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, जब वैवाहिक रिश्ते में कोई पक्ष नैतिक प्रतिबद्धता खो देता है, तो यह पूरी तरह से गोपनीयता का मामला है। व्यभिचार को अपराध की दृष्टि से सोचना एक अतीत में जाने जैसा होगा। इसका मतलब है कि अगर पति-पत्नी के रिश्ते में कोई धोखा देता है, तो यह उनका निजी मामला है। इसे अपराध मानना सही नहीं है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसले में कहा कि शीर्ष अदालत ने धारा 497 को यह कहते हुए असांविधानिक बताया था कि यह औरत को सिर्फ एक शिकार मानती है, जिसकी अपनी कोई मर्जी नहीं है। जस्टिस कृष्णा ने कहा, कानून में व्यभिचार करने वाली औरत को सजा नहीं दी जाती थी। उसे पीड़ित माना जाता था जिसे बहकाया गया। यह पुरुषवादी सोच जाहिर करता है।