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Biz Updates: 2000 से अधिक के UPI लेनदेन पर नहीं लगेगा जीएसटी; आईटी क्षेत्र में हो सकती हैं 4.5 लाख भर्तियां

Sat, 19 Apr 2025 05:03 AM IST
दीपक कुमार शर्मा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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बिजनेस अपडेट - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा। जीएसटी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) जैसे कुछ खास शुल्कों पर लगाया जाता है। सरकार के 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर जीएसटी लगाने पर विचार करने की खबरों पर वित्त मंत्रालय ने कहा, यह पूरी तरह से गलत, भ्रामक और निराधार है। फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। 

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आईटी क्षेत्र में पहली छमाही में हो सकती है 4.5 लाख भर्तियां
देश के सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की भर्तियों में 2025 की पहली छमाही में 7-10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। पूरे साल में यह क्षेत्र 4 से 4.5 लाख नई नौकरियां पैदा कर सकता है। आईटी क्षेत्र में वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में स्थिरता देखी गई थी और आय में सालाना आधार पर एक से तीन फीसदी का इजाफा हुआ था। फर्स्ट मेरिडियन बिजनेस सर्विसेज के सीईओ (आईटी स्टाफिंग) सुनील नेहरा ने कहा, यह दर्शाता है कि कंपनियां वैश्विक टेक्नोलॉजी निवेश के लिए अधिक लक्षित नजरिया अपना रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कम्प्यूटिंग, डाटा इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन में लगातार निवेश हो रहा है। यह नई टेक्नोलॉजी में विश्वास को दिखाता है। इसका असर भर्तियों पर भी देखने को मिलता है। एनएलबी सर्विसेज के सीईओ सचिन अलुग के अनुसार, पूरे उद्योग में नौकरी छोड़ने की औसत दर 13-15 फीसदी पर स्थिर हो गई है। कई कंपनियां 2025-26 में 10,000 से अधिक फ्रेशर्स की भर्ती करेंगी।

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व्यभिचार के मामले में आरोपी को बरी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, जब वैवाहिक रिश्ते में कोई पक्ष नैतिक प्रतिबद्धता खो देता है, तो यह पूरी तरह से गोपनीयता का मामला है। व्यभिचार को अपराध की दृष्टि से सोचना एक अतीत में जाने जैसा होगा। इसका मतलब है कि अगर पति-पत्नी के रिश्ते में कोई धोखा देता है, तो यह उनका निजी मामला है। इसे अपराध मानना सही नहीं है।  हाईकोर्ट की जज जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसले में कहा कि शीर्ष अदालत ने धारा 497 को यह कहते हुए असांविधानिक बताया था कि यह औरत को सिर्फ एक शिकार मानती है, जिसकी अपनी कोई मर्जी नहीं है। जस्टिस कृष्णा ने कहा, कानून में व्यभिचार करने वाली औरत को सजा नहीं दी जाती थी। उसे पीड़ित माना जाता था जिसे बहकाया गया। यह पुरुषवादी सोच जाहिर करता है।
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