भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने प्राथमिकता वाले क्षेत्र के लिए ऋण ढांचे में सुधार की जरूरत बताई है। इसने उभरते क्षेत्रों और डिजिटल बुनियादी ढांचे, हरित पहल, स्वास्थ्य सेवा जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों को इसमें शामिल करने का सुझाव दिया है। सीआईआई का कहना है कि भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक और राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक जैसे संस्थानों की भूमिकाएं निर्धारित हैं, क्योंकि उन्होंने वित्तपोषण के लिए क्षेत्रों को चिह्नित किया है।
प्राथमिकता क्षेत्र के कर्ज के नियमों के संशोधन पर विचार करने और कुछ नए व उभरते क्षेत्रों को पूरा करने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने की जरूरत है। आज कृषि क्षेत्र जीडीपी में 14 फीसदी योगदान देता है, लेकिन इसका प्राथमिक क्षेत्र कर्ज आवंटन 18 फीसदी पर बना है। यह तब से अपरिवर्तित है, जब इसका योगदान 30% से अधिक था।