देश में असंगठित क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों के कल्याण के लिए बने ई-श्रम पोर्टल पर सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के 8.4 करोड़ असंगठित मजदूर पंजीकृत हैं। पोर्टल पर पंजीकृत कुल मजदूरों में से 27.5 फीसदी केवल यूपी से हैं। करीब 3 करोड़ मजदूरों के साथ बिहार दूसरे स्थान पर है। 2.6 करोड़ के साथ प. बंगाल तीसरे और 1.8 करोड़ के साथ मध्य प्रदेश चौथे स्थान पर है। पोर्टल पर पंजीकृत करीब 52 फीसदी असंगठित मजदूर इन चार राज्यों के हैं। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी है। यह पोर्टल असंगठित श्रमिकों को पंजीकृत करने में मदद करता है और उन्हें यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) प्रदान करता है। इसे आधार से भी जोड़ा गया है। एक दिसंबर, 2024 तक देश में 30.4 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूर इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को 20 पैसे टूटकर 84.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। कई देशों में तनाव और घरेलू बाजारों में नरमी से रुपये में गिरावट आई। फॉरेक्स कारोबारियों ने कहा, आयातकों व विदेशी बैंकों से डॉलर की मांग के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। शुरुआती कारोबार में यह 84.70 पर खुला।
कृषि श्रमिकों व ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा महंगाई अक्तूबर में घटकर क्रमशः 5.96 फीसदी और छह फीसदी रह गई। सितंबर में यह क्रमश: 6.36 फीसदी व 6.39 फीसदी रही थी। इस दौरान कृषि श्रमिकों व ग्रामीण मजदूरों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 11 अंक तक बढ़ा।
कोलकाता: सर्दियों में मांग बढ़ने से अंडों की कीमतों में उछाल
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि सर्दियों की मांग और बांग्लादेश जैसे देशों को हाल में हुए निर्यात के कारण कोलकाता के बाजार में अंडे की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक पखवाड़े के भीतर अंडे की कीमत 6.5 रुपये प्रति पीस से बढ़कर आठ रुपये प्रति पीस हो गई है।
हालांकि, पोल्ट्री उद्योग निकाय ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश को निर्यात इस वृद्धि का प्राथमिक कारण नहीं है, क्योंकि यह देश भारत के पारंपरिक निर्यात बाजारों में से नहीं है। पश्चिम बंगाल पोल्ट्री फेडरेशन ने कीमतों में वृद्धि का कारण सर्दियों की मांग, पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत और बांग्लादेश और मलेशिया जैसे देशों को निर्यात को बताया, जो भारत के लिए नए बाजार हैं।
नवंबर और दिसंबर के लिए बांग्लादेश और मलेशिया के लिए लगभग 5 करोड़ अंडों का निर्यात ऑर्डर है। महासंघ के महासचिव मदन मोहन मैती ने पीटीआई-भाषा से कहा, "चारे की कीमतों में वृद्धि के कारण अंडे की कीमतें सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बढ़ी हैं। हालांकि, खुदरा कीमतें 7.5 रुपये प्रति इकाई से अधिक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि थोक दर 6.7 रुपये प्रति इकाई है। देश में अंडे का कोई संकट या कमी नहीं है।"
मैती ने बताया कि इनपुट लागत में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, मक्का की कीमतें– एक प्रमुख पोल्ट्री फीड घटक –2021 से 14 रुपये से दोगुनी होकर 28 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सर्दियों में अंडों की कीमतें बढ़ जाती हैं, लेकिन इस सीजन में उछाल ज्यादा है।