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BIZ Updates: फरवरी में 80.4 फीसदी रहा देश का राजकोषीय घाटा; रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए 30 दिन की मोहलत

Tue, 31 Mar 2026 06:01 AM IST
Pavan बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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केंद्र का राजकोषीय घाटा फरवरी में 2025-26 के बजट लक्ष्य का 12.52 लाख करोड़ रुपये यानी 80.4 प्रतिशत रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह 85.8 प्रतिशत था। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार ने 2025-26 में राजकोषीय घाटा (व्यय और राजस्व के बीच का अंतर) सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत यानी 15.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा है। महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी, 2026 के अंत तक केंद्र की कुल प्राप्तियां 27.91 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो बजट लक्ष्य का 82 प्रतिशत है। इन प्राप्तियों में 21.45 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (शुद्ध) और 5.8 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व शामिल है। सीजीए के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-फरवरी, 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार का कुल व्यय 40.44 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 81.5 प्रतिशत है। 
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रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए 30 दिन की मोहलत
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सरकार ने रत्न और आभूषण क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी)  ने निर्यातकों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने के लिए 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब युद्ध के चलते वैश्विक हालात तनावपूर्ण हैं और हवाई और समुद्री मार्ग से होने वाले निर्यात पर असर पड़ा है। इससे पश्चिम एशिया संकट से निपटने में मदद मिलेगी। यह क्षेत्र रत्न और आभूषण के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार है। भारत के कुल रत्न और आभूषण निर्यात में इसका हिस्सा लगभग 30 प्रतिशत है, जो इस वित्त वर्ष में अप्रैल-फरवरी के दौरान 26.2 अरब डॉलर रहा। सरकार के इन उपायों का उद्देश्य कठिनाइयों को दूर करके निर्यातकों की सहायता करना है। डीजीएफटी ने कहा, हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के जवाब में एचबीपी-2023 के अध्याय 4 के तहत रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए सुविधाकारी प्रावधान शामिल किए गए हैं।

विशिष्ट श्रेणियों के लिए निर्यात व आयात की अवधि को बिना किसी शुल्क या आवेदन की आवश्यकता के 30 दिन के लिए बढ़ाया जा रहा है। छूटों से निर्यात करने वालों पर नियमों का दबाव कम होगा। लेन-देन आसानी से पूरे हो पाएंगे और मौजूदा वैश्विक हालात की वजह से सामान की आवाजाही में हो रही देरी कम करने में मदद मिलेगी। 
  • प्रमाणन या ग्रेडिंग के लिए भेजे गए हीरों के पुनः निर्यात की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है।
  • विदेशी खरीदार से मिले कीमती धातुओं के बदले निर्यात की समयसीमा 90 के बदले 120 दिन होगी।
  • विदेश में प्रदर्शनी के लिए भेजे गए रत्न और आभूषणों के पुनः आयात की अवधि को भी 30 दिन के लिए बढ़ा दिया है।
  • सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस राहत का लाभ लेने के लिए निर्यातकों को कोई अलग आवेदन या शुल्क देने की जरूरत नहीं होगी।

ह्यूंडई व किआ की कारों को मिली 5-स्टार रेटिंग
ह्यूंडई मोटर इंडिया की वेन्यू और वेन्यू एनलाइन को भारत के क्रैश टेस्ट प्रोग्राम बीएनकैप के तहत 5-स्टार सुरक्षा रेटिंग मिली है। इसके अलावा, किआ सेल्टोस को भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। ये गाड़ियां बड़े और बच्चों, दोनों की सुरक्षा के लिए मजबूत साबित हुई हैं। वेन्यू के दोनों वेरिएंट ने एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन में 31.147 अंक हासिल किए। 

एमजी मोटर्स की कारें कल से होंगी महंगी
एमजी की कार खरीदना एक अप्रैल से महंगा हो जाएगा। जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर्स इंडिया ने घोषणा की है कि वह एक अप्रैल से अपने कुछ चुनिंदा मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रही है। कंपनी के मुताबिक, कीमतों में अधिकतम 2 फीसदी तक बढ़ोतरी की जाएगी। कंपनी ने बताया कि कच्चे माल की बढ़ती लागतों के असर को कम करने के लिए कुछ बोझ ग्राहकों पर डालने की फैसला लिया गया है। 

पायनियर फिल-मेड भी लाएगी आईपीओ
रेलवे के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी पायनियर फिल-मेड लि. ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बाजार नियामक सेबी के समक्ष दस्तावेजों का मसौदा जमा कराया है। प्रस्तावित निर्गम में 250 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें 250 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश भी शामिल होगी। कंपनी रकम का इस्तेमाल विस्तार पर करेगी। 

सात फीसदी के पार पहुंची 10 साल की बॉन्ड यील्ड
भारत के बॉन्ड बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली। देश की 10 साल की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 7 फीसदी के स्तर को पार कर गई। जुलाई 2024 के बाद पहली बार है जब यील्ड इस स्तर से ऊपर गई है। 10 साल यानी 2035 की बॉन्ड यील्ड कारोबार के दौरान बढ़कर 7.01 फीसदी तक पहुंच गई, जो पिछले सत्र के 6.94 फीसदी के मुकाबले काफी ऊंची है। 

ब्याज आय 50,000 रुपये से अधिक तो कटेगा टीडीएस
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के तहत आने वाली सभी बैंकिंग कंपनियां निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज आय पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) करेंगी। आयकर विभाग ने सोमवार को यह जानकारी दी। आयकर कानून के अनुसार, यदि बैंक या डाकघर जमा से प्राप्त ब्याज आय एक वित्त वर्ष में सामान्य नागरिकों के लिए 50,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक लाख रुपये से अधिक हो जाती है, तो उस पर टीडीएस काटा जाता है। 

ब्रिटेन ने एपल की सहायक कंपनी पर लगाया 4.88 करोड़ का जुर्माना
ब्रिटेन ने रूस पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन के मामले में एपल की आयरलैंड स्थित सहायक कंपनी एपल डिस्ट्रीब्यूशन इंटरनेशनल (एडीआई) पर 3.90 लाख पाउंड का जुर्माना लगाया है। सरकार के अनुसार एडीआई ने 2022 में एक प्रतिबंधित व्यक्ति से संबंधित दो भुगतान किए थे। एपल ने कहा, हम प्रतिबंधों का पूरी गंभीरता से पालन करते हैं। हमने खुद इन भुगतानों की पहचान कर सक्रिय रूप से सरकार को इसकी जानकारी दी थी। हम अपने नियमों को और मजबूत कर रहे हैं। 

एलीटकॉन इंटरनेशन और एमडी विपिन शर्मा समेत 6 पर बाजार में बैन
बाजार नियामक सेबी ने कथित हेरफेर और भ्रामक खुलासों के मामले में एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड, उसके प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन शर्मा समेत चार अन्य संस्थाओं को सिक्योरिटीज मार्केट से बाहर कर दिया है। सोमवार को जारी अंतरिम एक्स-पार्टी आदेश में सेबी ने इन पर करीब 51.26 करोड़ रुपये के कथित अवैध मुनाफे को जब्त करने का भी निर्देश दिया है। सेबी ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और इसके लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया जाएगा।

यह कार्रवाई एलीटकॉन इंटरनेशनल के शेयरों में ट्रेडिंग की जांच के बाद की गई है। सेबी को प्रथम दृष्टया यह संकेत मिले हैं कि कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने निवेशकों को गुमराह किया। आरोप है कि कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाईं, जबकि सकारात्मक जानकारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने कुछ नकारात्मक घटनाओं, जैसे जीएसटी से जुड़े मामलों, का खुलासा नहीं किया और इसी दौरान ऊंचे दाम पर शेयर बेचकर फायदा उठाया।
 

आरबीआई के सख्त फॉरेक्स नियमों से बैंकों पर दबाव, निकट अवधि में मुनाफे पर असर की आशंका
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के फॉरेक्स एक्सपोजर नियमों को सख्त करने के हालिया फैसले से बैंकिंग सेक्टर पर निकट अवधि में दबाव बढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से बैंकों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है, हालांकि बाजार को कुछ नियामकीय राहत की उम्मीद भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए बैंकों के ऑनशोर फॉरेक्स मार्केट में नेट ओपन पोजिशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय कर दी है, जो पहले पूंजी के 25% तक बोर्ड-निर्धारित सीमा पर आधारित थी। यह कदम रुपये में तेज गिरावट और ऑनशोर-ऑफशोर बाजार (NDF) के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए उठाया गया है।

हालांकि यह उपाय रुपये को समर्थन दे सकता है, लेकिन जेफरीज ने चेतावनी दी है कि बैंकों को अपनी बड़ी पोजिशन को जल्दी खत्म करना पड़ेगा, जिससे वित्तीय असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 10 अप्रैल तक पोजिशन घटाने की प्रक्रिया के चलते चौथी तिमाही में मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान हो सकता है, क्योंकि कुल पोजिशन 30-40 अरब डॉलर तक बड़ी हो सकती है। यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है। ऑनशोर और ऑफशोर बाजार के बीच स्प्रेड, जो सामान्य समय में 5-15 बेसिस पॉइंट्स रहता था, अब बढ़कर 75-90 बेसिस पॉइंट्स तक पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव और तेल-गैस की बढ़ती कीमतें हैं।
 

मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती से औद्योगिक उत्पादन में बढ़त, लेकिन लागत दबाव बढ़ा चिंता

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का औद्योगिक उत्पादन (IIP) फरवरी में 5.2% की दर से बढ़ा, जो जनवरी के 5.1% से थोड़ा अधिक है। इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका रही, जहां ग्रोथ 5.3% से बढ़कर 6% हो गई।

हालांकि, यह बढ़त पूरी तरह संतुलित नहीं रही। बिजली उत्पादन की वृद्धि 5.1% से घटकर 2.3% और माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 4.3% से घटकर 3.1% रह गई, जिससे कुल प्रदर्शन पर आंशिक असर पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों के समर्थन से मैन्युफैक्चरिंग औद्योगिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है।

इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कच्चे माल की आपूर्ति में दबाव और कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कारणों से आने वाले समय में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत में मोबाइल डेटा खपत 31GB पार, 5G ट्रैफिक में 70% से अधिक उछाल
भारत में प्रति यूजर औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत 31GB के पार पहुंच गई है, जिसमें 5G ट्रैफिक की तेज बढ़ोतरी का बड़ा योगदान है। नोकिया मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स (MBIT) 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक में अब 5G की हिस्सेदारी करीब 47% हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देशभर में मासिक 5G डेटा ट्रैफिक 12.9 एक्साबाइट (EB) तक पहुंच गया, जबकि कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक 27 EB प्रति माह के पार चला गया। यह बढ़ोतरी 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार और सस्ते 5G स्मार्टफोन्स की बढ़ती उपलब्धता के कारण संभव हुई है।

पिछले पांच वर्षों में डेटा खपत में 18% की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है। हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप्लिकेशन्स के बढ़ते इस्तेमाल ने इस मांग को और तेज किया है।

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भारत में डेटा खपत 31GB पार, 5G ट्रैफिक में 70% से ज्यादा उछाल
भारत में प्रति यूजर औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत 31GB के पार पहुंच गई है, जबकि 5G ट्रैफिक में सालाना आधार पर 70% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। नोकिया मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स (MBIT) 2026 के अनुसार, देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी अब करीब 47% हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देशभर में 5G डेटा ट्रैफिक 12.9 एक्साबाइट (EB) प्रति माह तक पहुंच गया, जबकि कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक 27 EB प्रति माह से अधिक रहा। 5G नेटवर्क के विस्तार और सस्ते 5G स्मार्टफोन्स की उपलब्धता ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया है।

पिछले पांच वर्षों में डेटा खपत में 18% की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) देखी गई है, जिसमें हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और AI आधारित एप्लिकेशन्स का बड़ा योगदान रहा है।
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