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बिजनेस अपडेट्स: सितंबर में 14.7 प्रतिशत बढ़ा जीएसटी संग्रह, 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार

Fri, 02 Oct 2026 01:44 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
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शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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सितंबर में सकल जीएसटी संग्रह 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आयात से मिलने वाले राजस्व में मजबूत वृद्धि और घरेलू खपत में तेजी ने जीएसटी संग्रह को बढ़ाने में मदद की। आंकड़ों के अनुसार, घरेलू गतिविधियों से सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, आयात से मिलने वाला राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये पहुंच गया।

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सितंबर में जीएसटी रिफंड 27,001 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में तीन प्रतिशत कम है। रिफंड को समायोजित करने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी संग्रह 18.1 प्रतिशत बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। चालू वित्त वर्ष में यह तीसरा महीना है जब सकल जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के पार गया है। इससे पहले अप्रैल और जुलाई में जीएसटी संग्रह क्रमशः करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये और 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।

अप्रैल से सितंबर के बीच सकल जीएसटी संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस अवधि में शुद्ध संग्रह 10.4 प्रतिशत बढ़कर 10.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
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आयात से जीएसटी संग्रह में तेज बढ़ोतरी
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सकल जीएसटी संग्रह का 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार करना दिखाता है कि वैश्विक दबाव के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कर संग्रह में वृद्धि व्यापक स्तर पर हुई है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक में जीएसटी संग्रह 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ा है। असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और टैक्स कॉन्ट्रोवर्सी मैनेजमेंट लीडर मनोज मिश्रा ने कहा कि सितंबर में आयात से जुड़े जीएसटी में 25.9 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई, जबकि घरेलू जीएसटी संग्रह में वृद्धि करीब 10 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि इसके पीछे मुद्रा विनिमय दर, कमोडिटी कीमतों और आयात से जुड़े कारकों का असर है। रुपये में कमजोरी से डॉलर में कीमत वाले आयात का रुपये में मूल्य बढ़ा है। वहीं, कच्चे तेल और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों ने कुल आयात बिल और इसके साथ जीएसटी आधार को बढ़ाया है।

मिश्रा के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोना और उर्वरक जैसी अधिक मूल्य वाली वस्तुओं के आयात में बढ़ोतरी ने भी आयात से जुड़े जीएसटी संग्रह को मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में वैश्विक कमोडिटी कीमतें, रुपये की स्थिति और आयात की मात्रा यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि यह तेजी कितनी कायम रहती है।

रिफंड में कमी पर भी नजर
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के पार्टनर विवेक जालान ने कहा कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि विनिर्माण और खपत की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, रिफंड में कमी से संकेत मिलता है कि विभागों की ओर से भुगतान रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि कारोबारों में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस रुझान पर नजर रखना जरूरी है।

जालान ने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत दरों में बड़ी कटौती के बावजूद संग्रह मजबूत बना हुआ है। हालांकि, सितंबर 2026 की वृद्धि में कुछ असर कम आधार का भी है। सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 की घोषणा और अधिसूचना के बीच अंतर के कारण कारोबार प्रभावित हुआ था।

जीएसटी दरों का युक्तिकरण 3 सितंबर 2025 को घोषित किया गया था और यह 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुआ। इसके चलते दरों में कटौती और उससे होने वाली कीमतों में कमी लागू होने तक ग्राहकों ने खरीदारी टाल दी थी। जालान ने कहा कि अब जीएसटी परिषद अगले चरण के सुधारों पर ध्यान दे सकती है। इनमें इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सेवाओं पर रिफंड की अनुमति देना, बड़े करदाताओं के लिए राज्यों में पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाना और ऑटिज्म केंद्रों पर जीएसटी दरों में कमी करना शामिल है।

जीएसटी परिषद की बैठक 7 अक्तूबर को
केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद की बैठक 7 अक्तूबर को होने वाली है। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जयसिंह ने कहा कि उद्योग की प्रमुख मांगों में इनपुट टैक्स क्रेडिट पर लगी पाबंदियों को तर्कसंगत बनाना और उन प्रक्रियागत समस्याओं को दूर करना शामिल है, जिनके कारण वैध क्रेडिट अटक जाते हैं।

उन्होंने इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं के समाधान और रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाने की भी जरूरत बताई, ताकि कारोबारों के नकदी प्रवाह में सुधार हो सके। प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि जीएसटी संग्रह मजबूत बना हुआ है। हालांकि, घरेलू राजस्व में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले आयात से जीएसटी में 26 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि कुल संग्रह में तेजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयात से आ रहा है।

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भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी) को वित्त वर्ष 2022-23 से जुड़े मामले में बिहार के जीएसटी अधिकारियों से 396.90 करोड़ रुपये का नोटिस मिला है। इसमें लागू ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। कंपनी ने कहा, वह नोटिस की जांच कर रही है और टैक्स सलाहकारों की राय के आधार पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी।

दूसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2.2%, उपभोक्ता खर्च मजबूत

अमेरिका की अर्थव्यवस्था अप्रैल से जून तिमाही में 2.2 फीसदी की दर से बढ़ी। उपभोक्ता खर्च और कारोबार निवेश मजबूत रहा। वाणिज्य विभाग ने बुधवार को बताया कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की यह वृद्धि जनवरी से मार्च की 2.5 फीसदी दर से कम रही। उपभोक्ता खर्च 3.8 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा। मजबूत शेयर बाजार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की संभावनाओं ने खर्च को बढ़ावा दिया। हालांकि, आयात में 12.6 फीसदी की वृद्धि से कुल वृद्धि दर प्रभावित हुई। कंप्यूटर चिप्स और AI निवेश से जुड़े उत्पादों के आयात में तेजी आई। आवास को छोड़कर कारोबार निवेश 9 फीसदी बढ़ा। आवास निवेश भी 2.8 फीसदी बढ़ा।

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