केंद्र सरकार हिंदुस्तान कॉपर लि में बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये छह प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचेगी, जिसका न्यूनतम भाव 514 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। यह सोमवार को बीएसई में हिंदुस्तान कॉपर के शेयर के बंद भाव से 10.38 प्रतिशत कम है। निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट में लिखा, भारत सरकार हिंदुस्तान कॉपर में तीन फीसदी हिस्सेदारी ओएफएस के जरिये बेचेगी। मांग अधिक रहने पर अतिरिक्त तीन प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया है। ओएफएस में प्रति शेयर न्यूनतम भाव 514 रुपये रखा गया है। हिंदुस्तान कॉपर का शेयर सोमवार को बीएसई में 0.17 फीसदी बढ़कर 573.55 रुपये पर बंद हुआ। चावला के अनुसार, बिक्री पेशकश का 10 फीसदी हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर रखे गए हैं। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश के जरिये 52,716 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
बंगाल के हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स में ₹6000 करोड़ की परियोजना
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में निवेश और पत्रकारों की वित्तीय सहायता बढ़ाने का एलान किया है। मुख्यमंत्री ने 14 अक्तूबर को हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स में 6,000 करोड़ रुपये की परियोजना के उद्घाटन की घोषणा भी की। यह दुर्गा पूजा से पहले होगा। सोमवार को राज्य सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम शुभेंदु ने कहा, 27 अगस्त को राज्य के सिलिकॉन वैली हब में L&T परियोजना का उद्घाटन किया जाएगा। सरकार ने पत्रकारों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने का एलान भी किया है। अब 154 पत्रकारों को प्रति माह 2,000 रुपये के बजाय 5,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी। राज्य सरकार ने पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था भी की है।
सिप्ला को यूएसएफडीए का झटका, पीथमपुर इकाई में मिलीं सात निरीक्षण संबंधी आपत्तियां
नई दिल्ली। प्रमुख दवा कंपनी सिप्ला लिमिटेड को अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक यूएसएफडीए से झटका लगा है। यूएसएफडीए ने कंपनी की पीथमपुर स्थित विनिर्माण इकाई के निरीक्षण के बाद सात आपत्तियां जारी की हैं। इन आपत्तियों को फॉर्म 483 के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिसकी जानकारी कंपनी ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को दी।
अमेरिकी खाद्य व औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) ने 17 से 25 अगस्त 2026 तक पीथमपुर इकाई का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण मौजूदा अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (सीजीएमपी) के अनुपालन की जांच के लिए किया गया था। निरीक्षण पूरा होने पर कंपनी को फॉर्म 483 प्राप्त हुआ। इस फॉर्म में सात निरीक्षण संबंधी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। यूएसएफडीए फार्मा कंपनियों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच करता है। ये आपत्तियां किसी भी दवा कंपनी के लिए गंभीर मानी जाती हैं। सिप्ला ने एक नियामक फाइलिंग में इस बात की पुष्टि की है।