अगले कोल इंडिया प्रमुख के रूप में बी साईराम की सिफारिश की
सरकारी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में नियुक्ति के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के चयन बोर्ड (पीईएसबी) ने नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के मौजूदा सीएमडी बी साईराम को कोयला क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का अगला चेयरमैन नियुक्त करने की सिफारिश की है। नए कोल इंडिया सीएमडी के लिए प्रमुख कार्यों में परिचालन चुनौतियों का समाधान करना शामिल होगा। जैसे उत्पादन बढ़ाना और कोयला निकासी में सुधार करना, जबकि सरकार कोयला आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की एक सहायक कंपनी है। सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) ने शनिवार को इस महत्वपूर्ण पद के लिए उनके नाम की सिफारिश की। नियुक्ति पर अंतिम निर्णय औपचारिक प्रक्रियाओं और उपयुक्त प्राधिकारियों के अनुमोदन के बाद लिया जाएगा। कोयला क्षेत्र में 34 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, साईराम ने सीसीएल में निदेशक (तकनीकी) और कोल इंडिया में कार्यकारी निदेशक जैसे प्रमुख पदों पर कार्य किया है।
सरकार ने मंत्रालयों को 12,167 एचएसएन कोड सौंपे
सरकार ने नियामक प्रक्रियाओं को ठीक करने और व्यापार में आसानी बढ़ाने के लिए 31 मंत्रालयों और विभागों के 12,167 एचएसएन कोडों की मैपिंग के लिए एक गाइडबुक तैयार की है। प्रत्येक उत्पाद को एक HSN (नामकरण की सामंजस्यपूर्ण प्रणाली) कोड के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। यह दुनिया भर में वस्तुओं के व्यवस्थित वर्गीकरण में मदद करता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि विशिष्ट एचएसएन कोड के लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग की पहचान की सुविधा के साथ यह पहल नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगी और व्यापार करने में आसानी को और बढ़ाएगी। इसके अलावा अस्पष्ट स्वामित्व के कारण अनमैप्ड कोडों को अवशिष्ट उत्पाद के रूप में वर्गीकृत किया गया।
राज्यों का वेतन, पेंशन और ब्याज खर्च 10 साल में ढाई गुना बढ़ा: कैग
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्यों ने वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने पर होने वाला खर्च पिछले 10 साल में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ा लिया है। साल 2013-14 में यह खर्च 6.26 लाख करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 15.63 लाख करोड़ रुपये हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि राज्यों का ज्यादातर पैसा तय खर्चों (वेतन, पेंशन और कर्ज पर ब्याज) में चला जाता है। पिछले 10 साल (2013-14 से 2022-23) में राज्यों का राजस्व खर्च उनके कुल खर्च का 80 से 87 प्रतिशत रहा। जीएसडीपी के मुकाबले यह 13-15 प्रतिशत तक बैठता है। वित्त वर्ष 2022-23 में राज्यों का कुल राजस्व खर्च 35.95 लाख करोड़ रुपये था। इसमें से 15.63 लाख करोड़ रुपये वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे तय खर्चों पर गए। इसके अलावा 3.09 लाख करोड़ रुपये सब्सिडी पर और 11.26 लाख करोड़ रुपये अनुदान और सहायता पर खर्च हुए। यानी राज्यों का बजट का बड़ा हिस्सा पहले से ही बंधा हुआ है।