भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 17 अगस्त 2026 को म्यूचुअल फंड के पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। नियामक ने एक एकीकृत आवेदन ढांचा पेश किया है। इसका उद्देश्य प्रारंभिक और अंतिम मंजूरी को सुव्यवस्थित करना है। अब संभावित प्रायोजकों को अपनी वित्तीय मजबूती, स्वामित्व, शासन और नियामक रिकॉर्ड के बारे में विस्तृत खुलासे करने होंगे। यह नया ढांचा सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 2026 के तहत आता है, जिसे जुलाई में अधिसूचित किया गया था। वर्तमान में म्यूचुअल फंड के पंजीकरण के लिए दो चरणों में आवेदन प्रक्रिया होती है। इसमें प्रायोजक को सैद्धांतिक मंजूरी और फिर अंतिम पंजीकरण शामिल है। सेबी ने मौजूदा प्रपत्रों को संशोधित कर एक एकल आवेदन प्रपत्र में एकीकृत करने का निर्णय लिया है। यह कदम प्रक्रिया को सरल बनाएगा। प्रस्तावित परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) के लिए भी विस्तृत जानकारी आवश्यक है।
छोटे करदाताओं की अघोषित विदेशी संपत्तियों और आय को टैक्स के दायरे में लाने के लिए आयकर विभाग ने विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना को अधिसूचित कर दिया है। यह 16 अगस्त 2026 से लागू हो गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मुताबिक, पात्र करदाता 31 दिसंबर 2026 तक अपनी अघोषित विदेशी संपत्तियों एवं आय की जानकारी ऑनलाइन दे सकेंगे। इस पर 30 फीसदी टैक्स के साथ इतना ही जुर्माना देना होगा। योजना का प्रस्ताव वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में किया गया था। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जिन्होंने अपनी विदेशी संपत्ति या विदेशी आय की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी है। छात्र, आईटी पेशेवर और नौकरी करने वाले एनआरआई इसके दायरे में आएंगे। घोषित संपत्ति दोबारा आय में नहीं जोड़ी जाएगी और इस पर काला धन कानून लागू नहीं होगा। पात्रता और संपत्ति के मूल्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां तय की गई हैं। पहली श्रेणी में 1 करोड़ और दूसरी श्रेणी में 5 करोड़ रुपये तक की संपत्ति को शामिल किया गया है।
60 फीसदी होगी कुल देनदारी
विदेशी संपत्ति या आय पर 30 फीसदी कर और इतना ही जुर्माना लगाने के बाद कुल देनदारी 60 फीसदी हो जाएगी। संपत्ति का बाजार मूल्य 31 मार्च 2026 के अनुसार तय किया जाएगा। यदि किसी करदाता की अघोषित विदेशी संपत्ति 60 लाख रुपये और आय 20 लाख है तो कुल घोषित राशि 80 लाख रुपये होगी। इस पर 48 लाख रुपये की देनदारी बनेगी।