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वैश्विक ब्रोकरेज फर्म यूबीसी ने सोमवार को भारत की प्रमुख एयरलाइन कंपनी इंडिगो की पेरेंट कंपनी की रेटिंग घटा दी है। कंपनी ने इसकी रेटिंग बाय से बदलकर न्यूट्रल कर दी है और टारगेट प्राइस भी घटाकर 4,940 रुपये कर दिया है, जो पहले 5,480 रुपये था। यूबीएस का कहना है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है।
खासकर अमेरिका और ईकान के बीच तनाव के कारण तेल और जेट ईंधन की कीमतें काफी ऊपर चली गई हैं। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, विमानन सेक्टर पहले से ही दबाव में है क्योंकि कई क्षेत्रों में सप्लाई की दिक्कतों के कारण जेट फ्यूल की कीमतें हाल के महीनों में लगभग दोगुनी हो गई हैं।
समझिए इसका इंडिगो पर क्या असर?
हालांकि यूबीएस ने यह भी माना है कि इंडिगो अपने बड़े नेटवर्क और बेहतर संचालन क्षमता के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों की तुलना में अभी भी मजबूत स्थिति में है। भारत सरकार ने भी विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को कुछ हद तक नियंत्रित किया है। अप्रैल 2026 के लिए एटीएफ की कीमतों में सिर्फ 9% की बढ़ोतरी की सीमा तय की गई है, जो पहले की 115% की अंतरराष्ट्रीय वृद्धि से काफी कम है। इससे एयरलाइनों को कुछ राहत मिली है।
शेयर बाजार का हाल भी समझिए
बाजार में इंडिगो के शेयरों में हल्की तेजी देखी गई और दोपहर 3 बजे यह करीब 1% बढ़कर 4,567 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हाल के प्रदर्शन की बात करें तो:-
- पिछले 5 दिनों में शेयर 3% गिरा।
- पिछले 1 महीने में 11% की तेजी।
- पिछले 6 महीनों में 21% की गिरावट।
- सालाना आधार पर करीब 10% की गिरावट।
कुल मिलाकर, बढ़ती ईंधन कीमतों और वैश्विक तनाव ने एयरलाइन सेक्टर पर दबाव बनाया है, लेकिन इंडिगो अभी भी अपने मजबूत संचालन के दम पर बाजार में टिके रहने की कोशिश कर रही है।
वैश्विक बाजार में दोगुनी हुई उर्वरक की कीमत, फिर भी खरीफ सीजन में 64 लाख टन यूरिया खरीदेगा केंद्र
सरकार इस खरीफ सत्र में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 64 लाख टन यूरिया और 19 लाख टन अन्य उर्वरक आयात करने की योजना बना रही है। यह खरीद योजना ऐसे समय बनाई जा रही है, जब ईरान संकट के कारण वैश्विक बाजार में उर्वरक के दाम दोगुने हो गए हैं। पश्चिम एशिया में घटनाक्रमों के प्रभाव पर अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि अधिकांश आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से हो रहे हैं। पूरा भरोसा है कि हमें समय पर आपूर्ति मिल जाएगी। उन्होंने आगे कहा, यूरिया और डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की खुदरा कीमतें अपरिवर्तित रहेंगी और खरीफ सत्र के लिए पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। यूरिया अब भी 266.50 रुपये प्रति 45 किलोग्राम के बैग और डीएपी 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम के बैग के हिसाब से बेचा जा रहा है। नियोजित आयात में से संकट शुरू होने के बाद से 9.4 लाख टन यूरिया पहले ही प्राप्त हो चुका है। फरवरी में वैश्विक निविदा के जरिये 13.07 लाख टन और सुरक्षित किया गया था, जबकि 25 लाख टन और उर्वरकों के लिए निविदा जारी की गई है और इसके मई में आने की उम्मीद है। अतिरिक्त सचिव ने कहा, संकट के बाद घरेलू यूरिया उत्पादन 35.4 लाख टन पहुंच गया है।