शेयर बाजार में जब ऊपरी स्तरों पर भारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का माहौल होता है, तब आम निवेशक असमंजस में रहता है कि अपना पैसा कहां सुरक्षित रखे और कहां निवेश कर मुनाफा कमाए। ऐसे दौर में बड़े ब्रोकरेज हाउस अपनी रिसर्च और रिपोर्ट्स जारी कर निवेशकों को राह दिखाने की कोशिश जरूर करते हैं, लेकिन इन पर आंख मूंदकर भरोसा करना कई बार घातक साबित हो सकता है। किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी हो जाती है।
जीएमआर एयरपोर्ट्स: ब्रोकरेज फर्म मैक्वरी ने इस पर आउटपरफॉर्म की रेटिंग देते हुए 120 रुपये का टारगेट तय किया है। इंटेलीसिस वेंचर्स के संस्थापक अमित जैन का मानना है कि वर्तमान बाजार मूल्य पर तुरंत खरीदारी की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। भाव में अभी करीब 10 रुपये की और गिरावट आ सकती है। 85 रुपये के आसपास खरीदारी सुरक्षित रहेगी।
बागमाने प्राइम: इस पर खरीद की राय देते हुए कोटक सिक्योरिटीज ने 118 रुपये का टारगेट दिया है। बीएनके सिक्योरिटीज के रचित खंडेलवाल का कहना है कि इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक : जेफरीज ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई पर बड़ा भरोसा जताते हुए 1,320 रुपये का तगड़ा टारगेट दिया है। बाजार विशेषज्ञ अमित जैन के अनुसार, एसबीआई का तकनीकी स्ट्रक्चर अभी थोड़ा कमजोर हुआ है और इसमें 880 रुपये तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसलिए मौजूदा भाव पर आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए। किसी के पास पहले से शेयर है, तो वे लोग 1,000 रुपये के आसपास निकलने का सोच सकते हैं।
मानसून की बेरुखी के कारण एक माह में 11% बढ़ीं अरहर की कीमतें
दालों के राजा कहे जाने वाले अरहर के तेवर एक बार फिर तीखे होने लगे हैं। मानसून की बेरुखी और योहारों से पहले मिलर्स की खरीद और के कारण अरहर के दाम लगातार ऊपर चढ़ रहे हैं। केडिया एडवाइजरी के रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में अरहर की कीमतों में लगभग 10.92 फीसदी और पिछले तीन महीनों में 11.02 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। अखिल भारतीय स्तर पर इसका औसत मण्डी भाव 8,141.25 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के सीजन के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 450 रुपये बढ़ाकर 8,450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो बाजार की कीमतों को नीचे गिरने से रोक रहा है।
कोरे डिजिटल पर सेबी की सख्ती ट्रेडिंग पर रोक
बाजार नियामक सेबी ने वित्तीय गड़बड़ियों, फर्जी अधिग्रहण और धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों के चलते कोरे डिजिटल लि. और उसके तीन शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने कंपनी, एमडी रवींद्र दोशी, मुख्य वित्तीय अधिकारी कश्मीरा दोशी और सीईओ चैतन्य दोशी को अगले आदेश तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है।
सेबी ने स्टॉक एक्सचेंज एनएसई को निर्देश दिया है कि वह कोरे डिजिटल को अपने एसएमई प्लेटफॉर्म से मेन बोर्ड पर जाने की अनुमति न दे। शुरुआती जांच में पाया गया कि कंपनी ने छोटे मंच से मुख्य प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए जरूरी पात्रता मानदंड पूरा दिखाने के उद्देश्य से अपने राजस्व को कृत्रिम रूप से बढ़ाया। वित्तीय स्थिति बेहतर बताने के लिए खातों में हेरफेर की और तीन सहायक कंपनियों के जरिये 541.3 करोड़ रुपये की आय को गलत तरीके से दर्ज किया। यह इस अवधि में कंपनी की कुल आय का लगभग 73 फीसदी है।