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ब्लिंकिट, स्विगी, इंस्टामार्ट और अमेजन नाउ जैसे क्विक कॉमर्स मंच से किराना और खाने-पीने का सामान मंगाने वालों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ऑनलाइन बिकने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी, उनकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नए प्रस्तावों के तहत ऑनलाइन उत्पादों की सूची में उनको तैयारी करने की तारीख, इस्तेमाल की अंतिम तारीख और बैच नंबर दिखाना अनिवार्य किया जा सकता है। साथ ही, कंपनियों के भ्रामक दावों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी तय करने पर विचार हो रहा है। एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहानी ने कहा, नियामक इन प्लेटफॉर्म को अधिक जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहा है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब देश में खाद्य सुरक्षा संबंधी शिकायतें बढ़ रही हैं।
बैंकों के करेंसी सौदों पर 20% रिस्क रिजर्व अनिवार्य, आरबीआई ने खत्म की न्यूनतम सीमा
रुपये में अस्थिरता और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक जोखिम को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (एफईआरआर) की अनिवार्यता का दायरा बढ़ा दिया है। साथ ही, इसे बैंकों (अधिकृत डीलरों) की ओर से अपनी संपत्तियों और देनदारियों पर करेंसी जोखिम को हेज (कम) करने के लिए किए जाने वाले रुपया डेरिवेटिव अनुबंधों पर भी लागू कर दिया है। अब तक ग्राहकों के साथ किए जाने वाले सौदों पर यह नियम 20 लाख डॉलर से ऊपर के लेनदेन पर ही लागू होता था, लेकिन बैंकों के अपने सौदों के लिए आरबीआई ने कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी है यानी हर पात्र सौदे पर रिजर्व रखना अनिवार्य होगा।
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, जब भी बैंक रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा की खरीद के लिए कोई पात्र डेरिवेटिव अनुबंध करेंगे, तो उन्हें उस अनुबंध के नोशनल मूल्य के 20% के बराबर रिजर्व बनाए रखना होगा। यह रिजर्व राशि रोजाना नकद (कैश) के रूप में आरबीआई के पास जमा करनी होगी। यह रिजर्व राशि अनुबंध के समाप्त (टर्मिनेट) होने तक केंद्रीय बैंक के पास ही बनी रहेगी।