केंद्रीय सरकार ने विभिन्न राज्यों की 15 पशुधन नस्लों और एक कुत्ते की नस्ल को अधिसूचित किया है। यह कदम प्रजनन कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और इन स्वदेशी नस्लों पर संप्रभुता स्थापित करने में मदद करेगा। कृषि मंत्रालय के तहत कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है।
अधिसूचित मवेशी नस्लों में कर्नाटक से 'कोप्पल', मध्य प्रदेश से 'महाकौशली', केरल से 'पेरियार' और महाराष्ट्र से 'उमरदा' शामिल हैं। गजट अधिसूचना के अनुसार, गोवा से 'गोमांचली' एकमात्र अधिसूचित भैंस नस्ल है। बकरी की प्रजातियों में राजस्थान और उत्तर प्रदेश से 'बत्तीसी' तथा राजस्थान से 'तोतापुरी' को अधिसूचित किया गया है। भेड़ प्रजातियों में असम से 'असोमी', उत्तराखंड से 'कौ देबर', महाराष्ट्र और कर्नाटक से 'मदग्याल' तथा बिहार से 'सीमांचली' शामिल हैं।
कृषि मंत्रालय के तहत कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग ने इन पशुधन और कुत्ते की नस्लों को मान्यता देना जनहित में आवश्यक माना है। सरकार का उद्देश्य इन स्वदेशी नस्लों पर अपनी संप्रभुता स्थापित करना है। 2019 से मंत्रालय सभी पंजीकृत नस्लों को गजट में अधिसूचित कर रहा है। यह प्रक्रिया देश की जैव विविधता को संरक्षित करने में सहायक है।
मंत्रालय ने कहा कि ये नस्लें पूरे देश के लिए अधिसूचित होंगी। इन्हें पशुपालन, उत्पादन, प्रजनन, संरक्षण, उपयोग, उपभोग और व्यापार के उद्देश्यों के लिए रखा और पाला जाएगा। यह अधिसूचना इन विशिष्ट नस्लों के विकास और उनके आर्थिक महत्व को बढ़ाएगी। इससे संबंधित राज्यों में पशुधन क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा।