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Budget: कभी पीएम ने बजट पेश किया, कुछ बजट पेश कर राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री बने; जानें भारत के वित्त मंत्रियों को

Thu, 30 Jan 2025 09:22 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Finance Ministers of India Budget 2025: आजाद भारत की यात्रा में देश के कई वित्त मंत्रियों ने अर्थव्यवस्था को वर्तमान स्तर पर लाने में अहम भूमिका निभाई है। जहां देश में कई लोगों ने प्रधानमंत्री रहते हुए बजट पेश किया तो कुछ वित्त मंत्री ऐसे भी रहे जिन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए बजट पेश किया, और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने। आइए जानते हैं, देश के अबतक के वित्त मंत्रियों की पूरी कहानी।
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बजट 2025 - फोटो : amarujala.com
वित्त मंत्री निर्मला सीतारण 01 फरवरी 2025 को बजट पेश करने वाली हैं। संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, केन्द्रीय बजट सरकार की अनुमानित आय और व्यय का वित्तीय विवरण होता है। स्वतंत्रता के बाद देश का पहला बजट नवंबर 1947 में पेश किया गया था। 2017-18 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिला दिया गया, जिससे अलग बजट की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई। आजाद भारत की यात्रा में देश के कई वित्त मंत्रियों ने अर्थव्यवस्था को वर्तमान स्तर पर लाने में अहम भूमिका निभाई है। जहां देश में कई लोगों ने प्रधानमंत्री रहते हुए बजट पेश किया तो कुछ वित्त मंत्री ऐसे भी रहे जिन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए बजट पेश किया, और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने। देश के कुछ वित्त मंत्री देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचे राष्ट्रपति चुने गए। आइए ग्राफिक्स जरिए नजर डालते हैं भारत के हर वित्त मंत्री के कार्यकाल पर।
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बजट 2025 - फोटो : Archive
आर.के. शनमुखम चेट्टी 
रामासामी चेट्टी कंदासामी शनमुखम चेट्टी स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री थे। उन्होंने देश का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान ही योजना आयोग की शुरुआत हुई थी। स्वतंत्र भारत का पहला बजट साढ़े सात महीने के लिए था। देश के पहले वित्त मंत्री ने 171.15 करोड़ रुपये की आमदनी और 197.39 करोड़ रुपये के खर्च का बजट पेश किया था।

कार्यकाल: 15 अगस्त 1947 - 17 अगस्त 1948 
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जॉन मथाई - फोटो : x.com/@INCIndia
जॉन मथाई
जॉन मथाई देश के पहले रेल मंत्री बने और फिर षणमुखम चेट्टी के बाद वित्त मंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान पंचवर्षीय योजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने योजना आयोग की बढ़ती शक्ति के विरोध में इस्तीफा दे दिया था।

कार्यकाल: 22 सितंबर, 1948 - 26 जनवरी, 1950; 26 जनवरी, 1950 - 6 मई, 1950; 6 मई, 1950 - 1 जून, 1950

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सीडी देशमुख - फोटो : Archive
सी.डी. देशमुख 
सीडी देशमुख यानी चिंतामन द्वारकानाथ देशमुख ने 1951-52 के लिए पहला अंतरिम बजट पेश किया। उनका कार्यकाल पहली पंचवर्षीय योजना की अवधि को कवर करता था। उन्होंने निगम कर सहित सभी करों में समग्र वृद्धि और सभी आयकर और सुपर-टैक्स दरों पर 5 प्रतिशत सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था। उनके कार्यकाल के दौरान, राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) की स्थापना की गई थी और वे इसके शासी निकाय के संस्थापक सदस्य थे।

कार्यकाल: 1 जून, 1950 - 13 मई, 1952; 13 मई, 1952 से 1 अगस्त, 1956
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टीटी कृष्णमाचारी - फोटो : Archive
टीटी कृष्णमाचारी
टीटी कृष्णमाचारी ने संपत्ति कर और व्यय कर की शुरुआत की। उनके कार्यकाल के दौरान एनएलसी, आईडीबीआई, आईसीआईसीआई और दामोदर घाटी निगम की स्थापना की गई। मुंद्रा घोटाले में उनका नाम सामने आने के बाद उन्होंने वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, जिसमें उनकी मिलीभगत पाई गई थी। कृष्णमाचारी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान देश में पहली बार गुप्त आय के स्वैच्छिक प्रकटीकरण की योजना शुरू की। 

कार्यकाल: 30 अगस्त, 1956 - 17 अप्रैल, 1957; 17 अप्रैल, 1957 - 14 फ़रवरी, 1958; 31 अगस्त, 1963 - 31 दिसंबर, 1965
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पंडित जवाहरलाल नेहरू - फोटो : अमर उजाला
जवाहरलाल नेहरू
जवाहरलाल नेहरू केंद्रीय बजट पेश करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री थे। कुछ अवधि के लिए उन्होंने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अपने पास रखी थी। उन्होंने उपहार कर की शुरुआत की थी। अपवाद के तौर पर केवल धर्मार्थ संस्थाओं, सरकारी कंपनियों, केंद्रीय या राज्य अधिनियमों के तहत स्थापित निगम और सार्वजनिक कंपनियां थीं, जिन्हें छह या उससे अधिक व्यक्तियों की ओर से नियंत्रित किया जाता था, उपहार कर के दायरे से बाहर रखा गया था। उन्होंने संपदा शुल्क अधिनियम में कुछ संशोधनों का भी प्रस्ताव रखा था। 

कब-कब वित्त मंत्रालय संभाला : 1 अगस्त, 1956 - 30 अगस्त, 1956; 14 फ़रवरी, 1958 - 22 मार्च, 1958
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मोरारजी देसाई - फोटो : Archive
मोरारजी देसाई
मोरारजी देसाई के नाम अब तक सबसे अधिक 10 बाजर बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। इसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है। उन्होंने कृषि आधारित शोध और विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा दिया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्थापना की। उन्होंने हरित क्रांति के बीज भी बोए। उन्होंने आयात लाइसेंसिंग प्रणाली की स्थापना की। देसाई ने 1968 में छोटे और बड़े निर्माताओं की ओर से माल के स्व-मूल्यांकन की प्रणाली शुरू की। उन्होंने जीवनसाथी भत्ते को भी हटा दिया, जिसके बाद पति और पत्नी को व्यक्तिगत करदाता बना दिया गया। उन्होंने गोल्ड कंट्रोल एक्ट 1962 पेश किया, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बैंकों की ओर से दिए गए सभी गोल्ड लोन को वापस लेने का फैसला लिया और सोने में वायदा व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया। अंततः इंदिरा गांधी की ओर से उनसे परामर्श किए बिना 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किए जाने के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 

कार्यकाल: 22 मार्च, 1958 - 10 अप्रैल, 1962; 10 अप्रैल, 1962 - 31 अगस्त, 1963; 13 मार्च, 1967 - 16 जुलाई, 1969

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सचिंद्र चौधरी (बाएं) - फोटो : Archive
सचिन्द्र चौधरी
सचिंद्र चौधरी संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। उनके कार्यकाल के दौरान खर्चे पर लगने वाला कर समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने बजट भाषण में कहा, "इस कर से होने वाली आय बहुत कम है, यानी ₹60.13 लाख या उसके आसपास, जो प्रशासन पर पड़ने वाले बोझ और करदाता को होने वाली असुविधा लिहाज से सही नहीं है।"

कार्यकाल: 1 जनवरी, 1966 - 11 जनवरी, 1966; 11 जनवरी, 1966 - 24 जनवरी, 1966; 24 जनवरी, 1966 - 13 मार्च, 1967

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Indira Gandhi - फोटो : अमर उजाला
इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी ने भी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला। वर्ष 1970-71 के अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा, "ऐसी नीतियों को तैयार करना आवश्यक है जो विकास की अनिवार्यताओं को जरूरतमंदों और गरीबों की भलाई की चिंता के साथ जोड़ती हों।" उनके कार्यकाल में हरित क्रांति के बाद श्वेत क्रांति आई, जिसे ऑपरेशन फ्लड के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की भी स्थापना की गई। 

कार्यकाल: (16 जुलाई, 1969 - 27 जून, 1970)

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यशवंत राव चौहान - फोटो : Archive
यशवंतराव बी. चव्हाण
यशवंतराव बी. चव्हाण ने सामान्य बीमा कंपनियों और कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया। उनके कार्यकाल के दौरान अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई। उन्होंने वित्त वर्ष 1973-74 के बजट भाषण में कहा, "मैं इस तथ्य से बहुत अवगत हूं कि चालू वर्ष के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव ने हमारे समाज को कमजोर किया और और अधिक असुरक्षित वर्गों की कठिनाइयों को बहुत बढ़ा दिया है। इस सरकार की नीति का मुख्य जोर इन कठिनाइयों को कम करना है।"

अवधि: 27 जून, 1970 - 18 मार्च, 1971; 18 मार्च, 1971 - 10 अक्टूबर, 1974

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चिदंब्रम सुब्रमण्यम - फोटो : Archive
चिदंबरम सुब्रमण्यम
वित्त मंत्री चिदंबरम सुब्रमण्यम के कार्यकाल में ईएसआई, ईपीएफ और पारिवारिक पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं स्थापित की गईं। वित्त वर्ष 1975-76 के अपने बजट भाषण में उन्होंने उन सरकारी कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए एक प्रोत्साहन बोनस योजना शुरू की, जो वर्ष के दौरान अपने भविष्य निधि खातों से कोई राशि नहीं निकालते हैं।

कार्यकाल: 10 अक्टूबर, 1974 - 24 मार्च, 1977

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हीरूभाई पटेल - फोटो : Archive
 
पटेल पहले गैर-कांग्रेसी वित्त मंत्री थे। उन्होंने अब तक का सबसे छोटा बजट भाषण दिया है, जिसमें केवल 800 शब्द थे। उन्होंने भारत में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों में भारतीय कंपनियों की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की नीति पेश की। 

कार्यकाल: 26 मार्च, 1977 - 24 जनवरी, 1979

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चौधरी चरण सिंह - फोटो : Archive
चरण सिंह
चरण सिंह ने वित्त वर्ष 1979-80 के अपने बजट भाषण में उन कार्यक्रमों पर गति और जोर देने प्रस्ताव रखा जिनका कृषि विकास और रोजगार को बढ़ावा देने पर वास्तविक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) पर भारी उत्पाद शुल्क लागू किया। 

कार्यकाल: 24 जनवरी, 1979 - 16 जुलाई, 1979

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हेमवती नंदन बहुगुणा - फोटो : Archive
हेमवती नंदन बहुगुणा

हेमवती नंदन बहुगुणा देश के वित्त मंत्री रहे पर उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान कभी बजट पेश करने का मौका नहीं मिला।

कार्यकाल: 28 जुलाई, 1979 - 19 अक्टूबर, 1979

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आर वेंकटरमण - फोटो : Archive
आर. वेंकटरमन
आर. वेंकटरमन ने देश का वित्त मंत्री रहते हुए जीवन रक्षक दवाओं, साइकिलों, सिलाई मशीनों और प्रेशर कुकरों पर उत्पाद शुल्क में छूट दी। उन्होंने रेडियो पर लाइसेंस शुल्क भी हटा दिया। आगे चलकर वे देश के राष्ट्रपति भी चुने गए।

कार्यकाल: 14 जनवरी, 1980 - 15 जनवरी, 1982)

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प्रणव मुखर्जी - फोटो : PIB
प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी पहली बार इंदिरा गांधी की सरकार में वित्त मंत्रालय संभाला। वित्त मंत्री बनकर उन्होंने जनता, खासकर एनआरआई से प्राप्त धन और निवेश पर ध्यान केंद्रित किया। उनके कार्यकाल में सार्वजनिक उपयोग के लिए निजी बचत जुटाने के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रमाणपत्र और पूंजी निवेश बांड की शुरुआत की गई। बाद में वे डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में भी वित्त मंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान खाद्य सुरक्षा विधेयक पेश किया गया। आय उत्पन्न करने के लिए 3जी स्पेक्ट्रम एयरवेव्स की नीलामी की गई। आयकर अधिनियम में पूर्वव्यापी प्रभाव से संशोधन किया गया ताकि भारतीय कंपनी की परिसंपत्तियों की खरीद में शामिल लेन-देन को कर योग्य बनाया जा सके। प्रणब मुखर्जी ने घाटे को कम करने के लिए सरकारी खर्च में भी कमी की। फिर वे देश के राष्ट्रपति भी चुने गए।

कार्यकाल: 15 जनवरी, 1982 - 31 अक्टूबर, 1984; 31 अक्टूबर, 1984 - 31 दिसंबर, 1984; 24 जनवरी, 2009 - 22 मई, 2009; 23 मई, 2009 - 26 जून, 2012

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वीपी सिंह - फोटो : Archive
वी.पी. सिंह
लघु उद्योगों को सहायता देने के लिए लघु उद्योग विकास बैंक की घोषणा विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल के दौरान की गई। उन्होंने कई गरीब हितैषी योजनाएं शुरू कीं, जैसे नगरपालिका सफाईकर्मियों के लिए दुर्घटना बीमा योजना और रिक्शा चालकों के लिए सब्सिडी वाले बैंक ऋण। उन्होंने निर्यात प्रोत्साहन और संशोधित मूल्य वर्धित कर (MODVAT) भी पेश किया, जो एक प्रमुख कर सुधार था। 

कार्यकाल: 31 दिसंबर, 1984 - 14 जनवरी, 1985; 14 जनवरी 1985 - 30 मार्च, 1985; 30 मार्च, 1985 - 25 सितंबर, 1985; 25 सितंबर, 1985 - 24 जनवरी, 1987

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी। - फोटो : amar ujala
राजीव गांधी
राजीव गांधी ने भी प्रधानमंत्री रहते हुए वित्त मंत्रालय संभाला और बजट पेश किया। कॉर्पोरेट टैक्स, जिसे बाद में न्यूनतम वैकल्पिक कर के रूप में जाना गया, पहली बार राजीव गांधी की ओर से ही पेश किया गया था। वर्ष 1987-88 के अपने बजट भाषण में उन्होंने आवास विकास, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा।

कार्यकाल: 24 जनवरी, 1987 - 25 जुलाई, 1987

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एनडी तिवारी - फोटो : Archive
एन डी तिवारी
एनडी तिवारी ने निर्यात से होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट प्रदान की। उन्होंने मशीनरी और कच्चे माल के आयात को बढ़ावा देने के लिए निर्यात ऋण पर ब्याज दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत कर दिया। 

कार्यकाल: 25 जुलाई, 1987 - 25 जून, 1988

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शंकर राव चव्हाण - फोटो : Archive
शंकरराव बी. चव्हाण
शंकरराव भावराव चव्हाण के कार्यकाल के दौरान जवाहरलाल नेहरू रोजगार योजना नामक एक गहन ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम शुरू किया गया था। उनके कार्यकाल में ही इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) को व्यक्तिगत बचत को इक्विटी में प्रवाहित करने के लिए शुरू किया गया था। म्यूचुअल फंड और निवेश से होने वाली आय को एक निश्चित सीमा तक कर से छूट दी गई थी। 

कार्यकाल: 25 जून, 1988 - 2 दिसंबर, 1989

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मधु दंडवते - फोटो : Archive
मधु दंडवते 
मधु दंडवते के कार्यकाल के दौरान, घरेलू व्यापार को विनियमित करने वाले स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम को समाप्त कर दिया गया ताकि कारीगरों और छोटे सुनारों को लाभ मिल सके। जिस समय दंडवते ने वित्त विभाग का कार्यभार संभाला, उसी समय शेयर बाजार नियामक सेबी की स्थापना की गई।

कार्यकाल: 5 दिसंबर, 1989 - 10 नवंबर, 1990

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यशवंत सिन्हा - फोटो : ANI
यशवंत सिन्हा
यशवंत सिन्हा ने चंद्रशेखर के पीएम रहते 1991 में अपने अंतरिम बजट में आर्थिक सुधारों की आधारशिला रखी थी। यशवंत सिन्हा बाद में अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री बने। उन्होंने आईटी क्षेत्र के लिए कर छूट को समाप्त कर दिया। संशोधित मूल्य वर्धित कर (MODVAT) को केंद्रीय मूल्य वर्धित कर (CENVAT) से बदल दिया गया। उन्होंने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र भी शुरू किए। उन्होंने ऋण बाजार पुनर्गठन की भी पहल की। 

कार्यकाल: 21 नवम्बर, 1990 - 21 जून, 1991; 19 मार्च, 1998 - 13 अक्टूबर, 1999; 13 अक्टूबर, 1999 - 1 जुलाई, 2002

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डॉ. मनमोहन सिंह - फोटो : ANI
डॉ. मनमोहन सिंह
डॉ. मनमोहन सिंह ने एलपीजी (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) नीति के माध्यम से देश के बाजार को खोल दिया, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने, राजकोषीय घाटे को कम करने और व्यापार नीति सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। 2004 में वे देश के प्रधानमंत्री बने। मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री रहते हुए भी वित्त मंत्रालय संभाला।

कार्यकाल: 21 जून, 1991 - 16 मई, 1996;  30 नवंबर, 2008 - 24 जनवरी, 2009; 26 जून, 2012 - 31 जुलाई, 2012

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जसवंत सिंह - फोटो : PIB
जसवंत सिंह
जसवंत सिंह के नाम सबसे कम समय तक वित्त मंत्री रहने का रिकॉर्ड है। वे 1996 में अटब बिहारी वाजपेयी की सरकार में महज 15 दिनों तक वित्त मंत्री रहे। बाद वे फिर अटल सरकार में वित्त मंत्री बनाए गए। उनके कार्यकाल के दौरान आयकर की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग शुरू की गई। उन्होंने मानक कटौती में मामूली वृद्धि करके और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) को आयकर से ₹5 लाख तक की छूट देकर करदाताओं को राहत प्रदान की। दो बच्चों की शिक्षा के लिए ₹12,000 तक के खर्च पर कर छूट शुरू की गई। 

कार्यकाल: 16 मई, 1996 - 1 जून, 1996; 1 जुलाई, 2002 - 22 मई, 2004

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पी चिदंबरम - फोटो : पीटीआई
पी. चिदंबरम
पी. चिदंबरम ने बढ़ते राजकोषीय घाटे से निपटने के लिए कर सुधार कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी (आईडीएफसी) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। 'ड्रीम बजट' ने देश में आर्थिक सुधारों के लिए एक रोडमैप पेश किया। इसमें आयकर दरों को कम करने, कॉर्पोरेट करों पर अधिभार हटाने और कॉर्पोरेट कर दरों को कम करने का प्रस्ताव किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान, ग्रामीण मजदूरों को 100 दिन का रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना शुरू की गई। कर-मुक्त बुनियादी ढांचा बांड जारी किए गए। उन्होंने 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कृषि ऋण माफ किए। पी. चिदंबरम ने ₹1 करोड़ से अधिक की कर योग्य आय पर 10% का अधिभार लागू किया। उनके कार्यकाल के दौरान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना शुरू की गई। महिलाओं के लिए विशेष रूप से पहला पीएसयू बैंक, भारतीय महिला बैंक शुरू किया गया। 

कार्यकाल: 1 जून, 1996 - 21 अप्रैल, 1997; 1 मई, 1997 - 19 मार्च, 1998; 23 मई, 2004 - 30 नवंबर, 2008; 31 जुलाई, 2012 - 26 मई, 2014

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इंद्र कुमार गुजराल - फोटो : Archive
आई.के. गुजराल
इन्द्र कुमार गुजराल ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में वित्त विभाग संभाला।

कार्यकाल: 21 अप्रैल, 1997 - 1 मई, 1997

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अरुण जेटली - फोटो : BJP
अरुण जेटली
अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान कई अन्य विभागों के साथ वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। जीएसटी और नोटबंदी उनके कार्यकाल के दो बड़े फैसले थे।2017 में उन्होंने फरवरी के आखिरी कार्य दिवस पर बजट पेश करने की परंपरा को बदल दिया और इसे 1 फरवरी को पेश किया। इसके अलावा, वे 2017-18 में रेलवे बजट का केंद्रीय बजट में विलय कर “एकीकृत” बजट पेश करने वाले पहले वित्त मंत्री थे।

कार्यकाल: 26 मई 2014 - 30 मई 2019

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पीयूष गोयल - फोटो : amarujala.com
पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने 2018 और 2019 में वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला। उन्होंने 1 फरवरी, 2019 को अरुण जेटली की अनुपस्थिति में अंतरिम बजट पेश किया, जो इलाज के लिए अमेरिका गए हुए थे। आयकरदाताओं को ₹12,500 की राहत उनके बजट का मुख्य आकर्षण थी। 

कार्यकाल: 23 जनवरी, 2019 – 15 फरवरी, 2019
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : एक्स/निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण इंदिरा गांधी के बाद दूसरी महिला वित्त मंत्री हैं जिन्होंने मोरारजी देसाई के इस्तीफे के बाद 1970-71 का बजट पेश किया। सीतारमण ने 5 जुलाई, 2019 को अपना पहला बजट भाषण पेश किया। सुपर रिच पर अतिरिक्त अधिभार, राइडर्स के साथ नए आयकर स्लैब, सीमा शुल्क में बढ़ोतरी और आत्मनिर्भर भारत विजन पर ध्यान केंद्रित करना और डिजिटल मुद्रा लॉन्च करने का प्रस्ताव इसकी मुख्य बातें थीं। उन्होंने अब तक लगातार सात बजट पेश किए हैं- छह वार्षिक बजट और एक अंतरिम बजट। सीतारमण 1 फरवरी, 2025 को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करेंगी, यह उनका लगातार 8वां बजट होगा।
 
कार्यकाल: 31 मई, 2019 - वर्तमान 
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