देश में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारतीयों का ऐसे खाद्य पदार्थों पर खर्च 2019 में बढ़कर 37.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जो 2006 में सिर्फ 90 करोड़ डॉलर ही था।
सरकार आने वाले समय में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों (यूपीएफ) पर स्वास्थ्य कर लगा सकती है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के उपभोग को हतोत्साहित करने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण में यह सिफारिश की गई है। साथ ही, ऐसे खाद्य पदार्थों पर सख्त नियमन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक कैलोरी होती है, जिन्हें खाने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा रहता है।
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दरअसल, कंपनियां अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का व्यापक रूप से मार्केटिंग करती हैं। साथ ही, स्वाद बढ़ाने वाले उपायों और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित करती हैं। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब बड़े ब्रांड ऐसे पदार्थों को 'स्वास्थ्य के लिए अच्छा' के रूप में प्रचारित करते हैं और खासकर बच्चों के लिए।
तेजी से बढ़ रही खपत
देश में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत तेजी से बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारतीयों का ऐसे खाद्य पदार्थों पर खर्च 2019 में बढ़कर 37.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जो 2006 में सिर्फ 90 करोड़ डॉलर ही था। इन उत्पादों की खुदरा बिक्री में 2011 से 2021 के बीच सालाना 13.7 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से वृद्धि देखने को मिली है।
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हर साल देनी होंगी 78.5 लाख नौकरियां
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, विकास और समृद्धि के बीच रोजगार महत्वपूर्ण कड़ी है। 10 से 24 वर्ष आयु वर्ग की करीब 26% आबादी के साथ भारत के पास जनसांख्यिकीय अवसर का लाभ उठाने का बहुत अच्छा मौका है। इसका लाभ उठाने के लिए 2030-32 तक हर साल 78.5 लाख नई गैर-कृषि नौकरियां देनी होंगी। 100 फीसदी साक्षरता के साथ शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता विकसित करने और उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने की भी आवश्यकता होगी।
फरवरी में कम बारिश के आसार, फसलों पर असर
जनवरी के बाद फरवरी में भी मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक देश के अधिकतर हिस्सों में फरवरी में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। जनवरी में औसतन 4.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद चौथी सबसे कम और 2001 के बाद तीसरी सबसे कम बारिश है। सर्दियों में होने वाली बारिश गेहूं, मटर, चना और जौ जैसी रंबी की फसलों के लिए महत्वपूर्ण है। सामान्य • से कम बारिश से इन फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और सरसों व चना जैसी फसलें जल्दी पक सकती हैं। ब्यूरो