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Rajya Sabha: 'बजट 2025-26 को बहुत ही कठिन समय में तैयार किया गया', राज्यसभा में बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण

Thu, 13 Feb 2025 04:36 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rajya Sabha: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गुरुवार को राज्यसभा में बजट बहस पर जवाब दिया। राज्यसभा में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कोविड संकट को संभाला और भारत दुनिया की शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया, जबकि इससे पहले वैश्विक वित्तीय संकट के बाद हम पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में एक थे। उन्होंने आगे क्या कहा, आइए जानें।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गुरुवार को राज्यसभा में बजट बहस पर जवाब दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2025-26 में कई क्षेत्रों और राज्यों के लिए आवटंन में कटौती के विपक्ष के आरोपों को निराधार करार देते हुए राज्यसभा में कहा कि आयकर सीमा बढ़ाने सहित बजट में घोषित विभिन्न उपायों से मध्यम वर्ग के लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। सीतारमण ने कहा कि उच्च सदन में आम बजट पर चर्चा में 90 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि बजट में उन सभी समस्याओं को ध्यान में रखा गया है जो आज देश के समक्ष हैं।

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उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों द्वारा ली जा रही उधारी के कारण ब्याज का बोझ एक समस्या है। उन्होंने कहा कि इससे उबरने के लिए बुद्धिमत्ता से राजकोषीय प्रबंधन करना आवश्यक उपाय है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस बार बजट इस प्रकार बनाया है, जिससे विकास को गति मिल सके, समावेशी विकास को हासिल किया जा सके, निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिल सके, गृहस्थ लोगों की भावनाओं को बल दिया जा सके तथा भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग की प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से क्रय शक्ति बढ़ायी जा सके।

उन्होंने कहा कि बजट में चार वर्गों-गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारी पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि पूरी अर्थव्यवस्था को बल मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं में इन वर्गों का ध्यान रखा गया है ताकि उन्हें लाभ मिल सके। सीतारमण ने कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय पर पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने पिछले साल के आंकड़े देते हुए कहा कि आगामी वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय में कोई कमी नहीं की गयी है।
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उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में प्रभावी पूंजीगत व्यय 19.80 लाख करोड़ रूपये रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि चर्चा में कुछ सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में बजटीय आवंटन घटाने की बात की थी। वित्त मंत्री ने इन आशंकाओं को निर्मूल करार देते हुए कहा कि क्षेत्रवार बजट आवंटन में कोई कमी नहीं की गयी है। 

वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.71 लाख करोड़ रूपये, ग्रामीण विकास के लिए 2.67 लाख करोड़ रूपये, शहरी विकास एवं परिवहन के लिए 6.45 लाख करोड़ रूपये, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए 2.27 लाख करोड़ रूपये तथा रक्षा क्षेत्र के लिए 4.92 लाख करोड़ रूपये (इसमें रक्षा क्षेत्र का पेंशन व्यय शामिल नहीं है) का बजट आवंटन किया गया। उन्होंने कहा कि 2025-26 में राज्यों को दिये गये कुल संसाधनों का मूल्य 25.01 लाख करोड़ रूपये होगा और इस प्रकार इसमें 4.92 लाख करोड़ रूपये की वृद्धि होगी।

राज्यसभा में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कोविड संकट को संभाला और भारत दुनिया की शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया, जबकि इससे पहले वैश्विक वित्तीय संकट के बाद हम पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में एक थे।

वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड के बाद के समय ने राज्यों को उधार लेने के लिए मजबूर किया है। न केवल भारतीय राज्यों को अन्य देशों को भी कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए उधार लेना पड़ा। बढ़ता कर्ज एक समस्या है... वैश्वीकरण बनाम विखंडन, वास्तविकता है; राजकोषीय विवेक बनाम बढ़ता कर्ज, वास्तविकता है; और हर कोई मुक्त बाजार की स्थिति चाहता है, लेकिन आपके पास आक्रामक टैरिफ बाधाएं और गैर-टैरिफ बाधाएं हैं, इसलिए आप एक ऐसी दुनिया का सामना कर रहे हैं, जहां बाजारों को मुक्त रखने के मामले में बहुत सारी बातें होती हैं। कोई भी देश अपने हित के लिए मुक्त बाजार नहीं चाहता है।
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