सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए प्रॉपर्टी और इक्विटीज की बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स बढ़ा सकती है। हालांकि निवेश और बचत पर जोर डालने के लिए सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कुछ छूट भी मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की होल्डिंग अवधि को 36 महीने से घटाकर 24 या 12 महीने कर देना चाहिए।
कोविड सेस
देश में कोरोना का कहर अभी भी बरकरार है लेकिन अब इससे लड़ने के लिए वैक्सीन तैयार हो चुकी है और टीकाकरण कार्यक्रम भी शुरू हो गया है। लेकिन 130 करोड़ लोगों को टीका लगाना आसान नहीं है, इसमें 50,000-60,000 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। जानकारों का मानना है कि ज्यादा टैक्स देने वाले करदाताओं से ही इस सेस की राशि को जुटाया जा सकता है।
आयात शुल्क
आयात शुल्क इसलिए लगाया जाता है ताकि सस्ते आयात से घरेलू इंडस्ट्री या उद्योगों को बचाया जा सके। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस साल स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और दूसरे उपकरणों सहित कम से कम 50 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है।
वर्क फ्रॉम होम टैक्स पर छूट
कोरोना वायरस की वजह से कई इंडस्ट्री ऐसी हो गई हैं, जो अब स्थायी तौर पर वर्क फ्रॉम होम कल्चर को अपना सकती हैं। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि सरकार की ओर वर्क फ्रॉम होम से काम करने वाले कर्मचारियों को इनकम टैक्स में अतिरिक्त छूट मिल सकती है।
मौजूदा समय में एनपीएस पर बना कानून कहता है कि खाते को बंद किए जाने के बाद केवल 60 फीसदी राशि पर ही टैक्स नहीं लगता है। बची हुई राशि से खाताधारकों को एन्यूटी खरीदनी होती है, यानि कि एन्यूटी पर टैक्स लगता है। जबकि अगर कोई शख्स ईपीएफ में निवेश कर रहा है तो उसे पूरी राशि पर टैक्स छूट की सुविधा मिलती है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि ईपीएफ की तरह एनपीएस पर भी सरकार को पूरी राशि की निकासी पर टैक्स छूट की सुविधा देनी चाहिए। इसके अलावा 40 फीसदी राशि से एन्यूटी खरीदने की अनिवार्यता को भी खत्म कर देना चाहिए।
शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एलान
हर बजट में शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कई घोषणाएं की जाती हैं। बजट में शिक्षा को लेकर किए गए एलान से बच्चो की पढ़ाई और उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है, वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर की गई घोषणाओं से सड़क, घर, रेलवे की लाइन, बिजली के टावर, अस्पताल जैसे अन्य मुद्दों पर जोर दिया जाता है।
'एक टैक्स प्रेक्टिशन के तौर आने वाले बजट 2021 से ये उम्मीद की जा सकती है कि धारा 80सी की कटौती सीमा 1,50,000 रुपये से बढ़ाकर 3,00,000 रुपये प्रति वर्ष होनी चाहिए। यह बदलाव निवेश को अधिक से अधिक बढ़ावा देगा और अंततः देश के समग्र विकास को बढ़ावा देगा। साथ ही, हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सरकार लॉन्ग टर्म और शॉर्ट-टर्म सेविंग्स के बीच स्पष्ट अंतर अपनाएगी, क्योंकि लॉन्ग टर्म सेविंग्स को प्रोत्साहित करने के लिए टैक्स पॉलिसी में कोई बड़ा प्रोत्साहन नहीं है, जो इस महामारी के दौरान बेहद जरूरी है। जीवन बीमा पॉलिसी और पेंशन फंड दीर्घकालिक उद्देश्य के लिए बचत का प्रमुख स्रोत हैं। इस बार हम उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार धारा 80 सी के अलावा इन दोनों के लिए अलग-अलग छूट की सीमा तय करने पर विचार करेगी।'
-अंकित सेहरा, संस्थापक और कर विशेषज्ञ, अंकित सेहरा एंड एसोसिएट्स