वित्त मंत्रालय के अनुसार दिसंबर 2020 में कुल जीएसटी कलेक्शन 1,15,174 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष इसी महीने की तुलना में यह 12 फीसदी ज्यादा है। इसके पहले नवंबर महीने में जीएसटी कर संग्रह 1.04 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 1.4 फीसदी ज्यादा है। पिछले वर्ष नवंबर में 1.03 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ था।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार नवंबर की तुलना में दिसंबर में शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी है। नवंबर महीने में देश में बेरोजगारी दर 6.51 फीसदी थी, जो दिसंबर में बढ़कर 9.06 फीसदी हो गई। इसी समयावधि में शहरों में बेरोजगारी दर 7.07 फीसदी से बढ़कर 8.84 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 6.26 प्रतिशत से बढ़कर 9.15 फीसदी हो गई। कृषि में गेहूं की बुवाई, गन्ने की कटाई और आलू की खुदाई का सीजन होने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में वृद्धि चिंताजनक है।
ताइवान की चाओयंग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी में कार्यरत आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि लगातार तीन महीने जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहना भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत वापसी का संकेत है। यह इस बात का भी संकेत है कि बाजार में मांग बनी हुई है और संबंधित सेक्टर इसका निर्माण करने और इसे संबंधित ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। यह निर्माण सेक्टर के साथ-साथ माल ढुलाई ट्रांसपोर्ट के भी पटरी पर लौटने के संकेत हैं। रेलवे ने भी इसी दौरान रिकॉर्ड माल ढुलाई की है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महामंत्री वीके बंसल ने कहा कि अर्थव्यवस्था में मजबूती के लिए सरकार को छोटे-मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने पर विचार करना चाहिए। कोरोना काल में बड़ी कंपनियों को बहुत कम नुकसान हुआ है जबकि यह क्षेत्र लगभग तबाही की स्थिति में पहुंच गया है। अगर सरकार इस सेक्टर को मजबूती दे पाती है तो इससे रोजगार उत्पादन और मांग जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में मजबूती आएगी।