फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट में निशाने पर रहा चीन, कई उत्पादों पर लगाया आयात शुल्क

Sun, 02 Feb 2020 05:02 PM IST
‌डिंपल अलवधी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 में मेक इन इंडिया के तहत भारत में उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने इसके लिए विभिन्न वस्तुओं व उपकरणों पर आयात शुल्क में इजाफा किया। खास बात है कि इनमें से अधिकतर वस्तुएं व उपकरण इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल सेक्टर के हैं, जहां चीन का दबदबा रहा है। इस कदम को चीन के इसी दबदबे को भारतीय चुनौती माना जा रहा है।

विज्ञापन


बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उल्लेख किया कि मेक इन इंडिया की पहल के लिए मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन और उनसे जुड़े उपकरणों पर कस्टम्स ड्यूटी लगाई गई थी। इससे भारत में उत्पादन को तेजी देने का लक्ष्य था। इन्हें बढ़ाया जा रहा है, ताकि घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर काम जारी रखा जा सके। साथ ही उत्पादकों को बराबरी का मैदान मिले। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि ‘सस्ती और घटिया क्वालिटी की वस्तुओं का आयात भारत में रोजगार के अवसर बढ़ाने में बाधा बना हुआ था।’ इस बात से संकेत मिलते हैं कि भारत के उत्पादन क्षेत्र को चीन के मुकाबले बराबरी पर लाने के लिए सरकार जुटी है। इसका फायदा भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) सेक्टर को मिलेगा।

मेक इन इंडिया के लिए एमएसएमई की मजबूती इसलिए जरूरी

  • भारत का एमएसएमई सेक्टर उद्योगों रीढ़ है
  • 5.10 करोड़ इकाइयां इस वर्ग में आती हैं सरकार की मेक इंडिया इंडिया रिपोर्ट के अनुसार
  • 11.7 करोड़ लोगों को इनमें रोजगार मिला है
  • सात फीसदी है देश की जीडीपी में योगदान
  • 45 फीसदी योगदान देश के कुल उत्पादन में
  • 40 फीसदी निर्यात भी भारत से यही एमएसएमई कर रही हैं

अकेले पीसीबीए का आयात छह हजार करोड़

देश में हर वर्ष करीब 30 करोड़ प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली (पीसीबीए) या कहें मदरबोर्ड की खपत है। इनका अधिकतर उपयोग फोन में होता है। इनमें से 16 करोड़ भारत में बन रहे हैं, बाकी का आयात होता है। यह करीब 6 हजार करोड़ का बैठता है। अधिकतर आयात चीन से हो रहा है। ऐसे में इन पर आयात शुल्क दोगुना करते भारत सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक उत्पादन भारत में हो। खासतौर से मोबाइल फोन का, वह भी ऐसे समय में जब 5जी टेक्नोलॉजी हमारी दहलीज पर खड़ी है।

इन पर भी असर

चिकित्सा उपकरणों पर आयात शुल्क के जरिए पांच फीसदी हैल्थ सेस, राष्ट्रीय आपदा कोष शुल्क, सिगरेट व तंबाकू उत्पादों पर आयात शुल्म में वृद्धि को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। जूते, चप्पल आदि पर आयात शुल्क में वृद्धि का फायदा भी भारतीय उत्पादकों को होगा, जो इनके 30 से 40 फीसदी हिस्से आयात कर रहे हैं। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में 70 फीसदी आयातित जूते बेच रही हैं।

कुछ उत्पाद महंगे, लेकिन उत्पादन बढ़ाना अहम

जानकारों के अनुसार सरकार का यह कदम फिलहाल इन वस्तुओं की कीमतें सौ से हजारों रुपये तक बढ़ा सकता है, लेकिन लंबे समय में इनका फायदा उत्पादन व रोजगार बढ़ाने के रूप में मिलेगा। इस अवसर को भुनाने के लिए भारतीय उत्पादों में विश्वास बढ़ाने की भी जरूरत बड़ी कंपनियों को है।

उत्पाद शुल्क और वस्तुएं 

उत्पाद  नई दर (फीसदी में) पुरानी दर (फीसदी में)
खिलौना ट्रायसाइकिल 60 20
जूते-चप्पल 35 25
चीनी मिट्टी के बर्तन  20 10
स्टेशनरी  20 10
छिलके सहित अखरोट 100 30

इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल

उत्पाद नई दर (फीसदी में) पुरानी दर (फीसदी में)
हेयर ड्रायर व शेविंग ब्लेड 20 10
चाय-कॉफी मेकर, टोस्टर  20 10
वॉटर कूलर 15 10
पूरी तरह बने इलेक्ट्रिक बस व ट्रक 40 25
कंडम कार, दोपहिया व तीन पहिया वाहन 15 10
मोबाइल फोन चार्जर  20 15
मदरबोर्ड 20 10
फ्रिज व एसी कंप्रेसर 12.5 10
छोटी मोटर 10 7.5
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें