कम समय में ज्यादा पैसे जमा करने के लिए निवेशक कोई न कोई विकल्प खोजते रहते हैं। इन्हीं में से एक है म्यूचुअल फंड। आज कल कई लोग म्यूचुअल फंड निवेश कर रहे हैं। लेकिन एक फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट के बाद म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वालों के हाथ निराशा लगी है।
सरकार ने लिया यह फैसला
दरअसल केंद्र सरकार ने डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कंपनियों पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स हटाने का प्रस्ताव किया है। इस फैसले के बाद डिविडेंड पर टैक्स निवेशकों को चुकाना होगा।
मौजूदा समय में यह है नियम
वर्तमान के नियम के अनुसार, कंपनियों को शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड भुगतान पर 15 फीसदी की दर से डीडीटी चुकाना होता है। इतना ही नहीं, इसपर सरचार्ज और सेस भी लगाया जाता है। बता दें कि सरचार्ज और सेस कंपनी द्वारा लाभ पर दिए गए टैक्स के अलावा है।
निवेशकों को थी ये उम्मीद
इससे पहले निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स को खत्म किया जाए। हालांकि, केंद्र सरकार ने बजट 2020 के दौरान ऐसा कोई एलान नहीं किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर एलटीसीजी टैक्स को कायम रखा है। साथ ही निवेश उम्मीद जता रहे थे कि अगर सरकार इसे खत्म नहीं करती है, तो एलटीसीजी टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड को बढ़ाया जाए। लेकिन इस पर भी सरकार ने कोई एलान नहीं किया है। इसलिए निवेशकों के हाथ निराशा लगी है।
क्या है म्यूचुअल फंड ?
म्यूचुअल फंड सात प्रकार के होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सिर्फ पांच प्रकार के फंड की होती है। ये फंड हैX इक्विटी फंड, बैलेंस फंड, इंडेक्स फंड, डेब्ट फंड, मनी मार्केट फंड, गिल्ड फंड और लिक्विड फंड।