पांच जुलाई को पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उनका लक्ष्य बेरोजगारी को खत्म करना होगा और ग्रामीण इलाकों के विकास पर उनका ध्यान केंद्रित रहेगा।
ऐसा माना जा रहा है कि अगले पांच सालों के लिए निर्मला सीतारमण का लक्ष्य देश से बेरोजगारी को खत्म करना और अर्थिक विकास करना होगा।
इस मामले से अवगत अधिकारियों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पहला बजट अगले पांच वर्षों में सुधारों के लिए मंच तय करेगा, जो भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन की पेशकश का बुनियादी ढांचा होगा।
छह जून को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम लोगों के लिए बड़ी घोषणा की थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार रेपो रेट को छह फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया गया था। नौ सालों में पहली बार म इतना कम हुआ है। अब ऐसा माना जा रहा है कि आगे भी आरबीआई द्वारा इस दर में और कटौती हो सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकार का ध्यान ग्रामीण भारत पर रहेगा। पांच जुलाई को पेश होने वाले बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च के बीच देश की विकास दर 5.8 फीसदी रही थी। यह पिछले वित्त वर्ष की तीन तिमाही के मुकाबले भी काफी कम है। इससे पहले की तीन तिमाही में विकास दर का आंकड़ा क्रमश: 8.2 फीसदी, 7.1 फीसदी और 6.6 फीसदी रहा था। अगर चार तिमाही का औसत निकाला जाए तो फिर पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 6.8 फीसदी रही है।
देश में बढ़ती बेरोजगारी पर भी सरकार का ध्यान रहेगा। रोजगार के मोर्चे पर लोकसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद सरकार ने समय-समय पर लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) – वार्षिक रिपोर्ट (जुलाई 2017-जून 2018) जारी किया, जिसमें बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी थी, जो 45 वर्षों में सबसे अधिक थी।