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Odisha: विकसित ओडिशा का मंत्र साकार करने के लिए चल रही ब्रिज सह वनधारा परियोजना, ग्रामीण विकास में है मददगार

सार

Odisha: ओडिशा सरकार  के जनसंपर्क अधिकारी बिनायक मिश्रा ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से ओडिशा में विभिन्न स्थानों पर बनाई जा रही 'पुल-सह-वनधारा' परियोजनाएं राज्य के समग्र विकास में लाभकारी हैं। आइए जानें इसके फायदे।
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ब्रिज सह वनधारा - फोटो : Odisha Government
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विस्तार
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ओडिशा सरकार का ग्रामीण विकास विभाग राज्य में 'ब्रिज सह वनधारा' परियोजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर रहा है। 'विकसित भारत के लिए विकसित ओडिशा' राज्य सरकार का नया विकास मंत्र है। इसे साकार करने के लिए ग्रामीण विकास को निरंतर महत्व दिया जा रहा है और 'ब्रिज सह वनधारा' परियोजना उस दिशा में एक नई कोशिश है। इससे जल स्तर बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण कनेक्टिविटी भी मजबूत हो रही है, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका में भी सुधार हो रहा है। 

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ओडिशा सरकार के जनसंपर्क अधिकारी बिनायक मिश्रा के अनुसार ग्रामीण विकास विभाग की ओर से ओडिशा में विभिन्न स्थानों पर बनाई जा रही 'पुल-सह-वनधारा' परियोजनाएं राज्य के समग्र विकास में लाभकारी हैं। इनमें जून 2024 से नवंबर 2024 तक विभाग की आरे से 18 'ब्रिज-सह-वनधारा' परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 71 नई और परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

'ब्रिज-सह-बंधारा' परियोजनाओं के कई उपयोग हैं। परिवहन की सुविधा के साथ-साथ जल संरक्षण भी किया जा सकता है, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी। संग्रहित जल का उपयोग सिंचाई के लिए तथा पेयजल के रूप में किया जा सकता है। ये परियोजनाएं क्षेत्र के भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करती हैं और संग्रहीत पानी का उपयोग मवेशियों और अन्य जानवरों द्वारा पीने के पानी के रूप में भी किया जा सकता है। यह आस-पास के क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि को रोकने के साथ मिट्टी के कटाव को भी रोक सकता है।
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने बजट भाषण में 'ब्रिज-कम-वियर्स' के निर्माण पर जोर दिया और घोषणा बताया कि पर्यावरण अनुकूल कदम के रूप में, सरकार चेक डैम/ब्रिज-कम- का निर्माण करके जल संरक्षण को महत्व दे रही है। इसके लिए बजट में 88 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे जल संरक्षण, सिंचाई, पशुओं के लिए पीने का पानी और भूजल संरक्षण सुनिश्चित होगा।

मिश्रा ने बताया कि सुंदरगढ़ जिले में चंद्रपुर-कुलकुटा रोड पर फटाटांगर नाला, अंगुल जिले में रेंगाली-कुलुमानियालु रोड पर बलरामपुर नाला, कंधमाल जिले में कुदुटुली-दमरिकिया रोड और देवगढ़ जिलों के झारासाही से नकटीमल रोड पर एक स्थानीय नाला इसके कुछ उदाहरण हैं।

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