ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए भारत को एक अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता ऋण राशि दी है, जिसका इस्तेमाल इस महामारी से होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए किया जाएगा।
वी कामथ कर रहे हैं नेतृत्व
शंघाई स्थित एनडीबी की स्थापना ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने 2014 में की थी और इस समय इसका नेतृत्व दिग्गज भारतीय बैंकर के वी कामथ कर रहे हैं।
30 अप्रैल को दी मंजूरी
एनडीबी के निदेशक मंडल ने 30 अप्रैल को भारत के लिए 'आपातकालीन सहायता कार्यक्रम ऋण' को मंजूरी दी थी और इसका मकसद कोरोना वायरस महामारी के कारण होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम करना है।
सदस्य देशों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है एनडीबी
इस संदर्भ में बैंक के उपाध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी झेन झू ने एक बयान में कहा कि, 'एनडीबी विपत्ति के समय में अपने सदस्य देशों की मदद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। तत्काल अनुरोध पर तेजी से कार्रवाई करते हुए भारत को आपातकालीन सहायता कार्यक्रम ऋण को मंजूरी दी गई।'
मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि, 'कोरोना संकट के बीच मैं विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करता हूं। ये पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं और आज जिस पैकेज का एलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब 20 लाख करोड़ रुपये का है। ये पैकेज भारत की जीडीपी का करीब 10 फीसदी है। उन्होंने कहा, इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को 20 लाख करोड़ रुपये का संबल मिलेगा। 20 लाख करोड़ का ये पैकेज 2020 में देश की विकास यात्रा को नई गति देगा। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पूरा करने के लिए इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी सभी पर बल दिया गया है।'