व्यापार संतुलन और तकनीकी मोर्चे पर उद्योग जगत की क्या राय है?
समूह के विस्तार के साथ ही सहयोग का दायरा भी व्यापक हुआ है। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने बताया कि 11-सदस्यीय विस्तार से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल समाधान जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने संतुलित व्यापार पर जोर देते हुए कहा, "हर देश ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) चाहता है, लेकिन व्यापार तटस्थता का प्रबंधन करना अधिक बेहतर होगा, जिसके बाद व्यापार अधिशेष प्रत्येक राष्ट्र की क्षमता पर निर्भर करता है"। मिंडा ने यह भी याद दिलाया कि ब्रिक्स की शुरुआत केवल व्यापार के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन अब यह भू-राजनीति, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और कृषि जैसे बहुआयामी क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है।
एमएसएमई और ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्या हैं प्रमुख प्राथमिकताएं?
भारतीय निर्माताओं और औद्योगिक हितधारकों का ध्यान केवल वार्ताओं तक सीमित न होकर ठोस वाणिज्यिक परिणामों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर केंद्रित है। क्षेत्र-वार प्रमुख बिंदुओं पर नजर डालें तो:
- एमएसएमई और विनिर्माण: डावर फुटवियर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व एसोचैम नेशनल एमएसएमई काउंसिल के सह-अध्यक्ष पूरन डावर ने भारत की विकास यात्रा पर बात की। उन्होंने कहा, "हम इस 7.8% की वृद्धि दर को दोहरे अंकों में देखना चाहते हैं; हम देश को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं"।
- ऊर्जा और नेट-जीरो लक्ष्य: रिवील एनर्जी के प्रबंध निदेशक व संस्थापक (पूर्व कर्नल) रोहित देव ने कहा कि भारत का ऊर्जा विस्तार विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, बायोफ्यूल्स (जैव ईंधन) को बढ़ावा देने और वित्तीय निवेश जुटाने पर टिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का नेट-जीरो लक्ष्य ग्रामीण विकास और बायोफ्यूल्स के विकास से सीधे जुड़ा हुआ है।
18वें ब्रिक्स सम्मेलन का क्या संदेश है?
भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को आयोजित हो रहा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा। ब्रिक्स बिजनेस फोरम निजी क्षेत्र के प्रमुख मंच के रूप में व्यापार, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, एमएसएमई, मानक सहयोग और वैल्यू चेन एकीकरण पर सुझाव तैयार करता है। इन सिफारिशों को सीधे शिखर सम्मेलन के घोषणापत्रों और कार्ययोजनाओं में शामिल किया जाता है, जो आने वाले समय में अंतर-समूह निवेश और वैश्विक आर्थिक स्थिरता का नया रोडमैप तैयार करेंगी।