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SEBI: कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बैंकों-बीमा कंपनियों की एंट्री पर ब्रेक, सेबी प्रमुख तैयारियों पर क्या बोले?

Mon, 04 May 2026 03:01 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेबी चेयरमैन के मुताबिक आरबीआई और आईआरडीएआई फिलहाल बैंकों और बीमा कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, सीकेवाईसी 2.0 पर काम जारी है और जुलाई तक इसका ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।
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तुहिन कांत पांडे, सेबी चेयरमैन - फोटो : ANI
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विस्तार
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सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कहा कि आरबीआई और भारतीय बीमा विनियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई)बैंकों और बीमा कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में भागीदारी की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों नियामकों के पास इस रुख के पीछे ठोस कारण हैं और फिलहाल इस सेगमेंट को लेकर वे सहज नहीं हैं।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में आयोजित आईएमसी कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के दौरान पांडे ने कहा कि खासतौर पर बीमा क्षेत्र लंबी अवधि के निवेश पर आधारित होता है, ऐसे में कमोडिटी डेरिवेटिव्स जैसे उतार-चढ़ाव वाले सेगमेंट के साथ इसका तालमेल एक बड़ी चिंता है। उन्होंने बताया कि सेबी की इस मुद्दे पर बैंकिंग और बीमा नियामकों के साथ हुई बातचीत में सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

जोखिमों पर जताई चिंता

डिजिटल और तकनीकी जोखिमों पर चिंता जताते हुए पांडे ने कहा कि एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग इंसानी नियंत्रण से कहीं तेज काम करती है और डिजिटल प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आगाह किया कि नई पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स जहां कमजोरियों की पहचान करने में मददगार हैं, वहीं उनका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी संभव है।

सीकेवाईसी 2.0 (Central KYC) पहल पर उन्होंने बताया कि यह अभी विकास के चरण में है और इसका उद्देश्य पूरे वित्तीय क्षेत्र में एकीकृत केवाईसी प्रणाली लागू करना है। इस परियोजना का नेतृत्व सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइजेशन एसेट रिकंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट (सीईआरएसएआई) कर रहा है, जिसमें विभिन्न नियामकों के सुझाव शामिल किए जा रहे हैं। सेबी ने हाल ही में सीईआरएसएआई के साथ बैठक कर प्रमुख मुद्दों की पहचान की है और उम्मीद जताई है कि जुलाई के अंत तक इसका ढांचा तैयार हो सकता है।

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इससे पहले, पिछले महीने आईएमएफ-विश्व बैंक की स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरानभारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई)  और यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल के कार्यक्रम में पांडे ने कहा था कि भारत का पूंजी बाजार अब वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक आधार और बढ़ते निवेशक आधार इसके प्रमुख कारण हैं।
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