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Bombay High Court: हाईकोर्ट में धूत के वकील का दावा- गिरफ्तारी गलत, सीबीआई बोली- जांच में नहीं कर रहे थे सहयोग

Fri, 13 Jan 2023 11:26 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ICICI Loan Fraud: वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत के वकील ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति की गिरफ्तारी अनुचित है क्योंकि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं। 
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Bombay high court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण मामले में वीडियोकॉन समूह के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत की ओर से दायर रिट याचिका पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रखा। उन्होंने सीबीआई की ओर से उन्हें गिरफ्तार करने का विरोध करते हुए याचिका दायर की थी। 

वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत के वकील ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति की गिरफ्तारी अनुचित है क्योंकि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं। 

दूसरी ओर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दावा किया कि वह जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे। सीबीआई की ओर से धूत को 26 दिसंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं। धूत ने उनके खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है और अंतरिम जमानत भी मांगी है।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और पीके चव्हाण की खंडपीठ ने धूत के वकील संदीप लड्डा और सीबीआई के वकील राजा ठाकरे दोनों को सुनने के बाद अंतरिम राहत पर अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

एडवोकेट लड्डा ने तर्क दिया कि दिसंबर 2017 में 'प्रारंभिक जांच' (पीई) दर्ज होने के बाद से धूत सीबीआई के सामने "31 बार" पेश हो चुके हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद जिस अदालत में धूत पेश हुए थे वहां से भी उन्हें यह कहकर जमानत दे दी गई थी कि वह जांच में सहयोग कर कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि धूत पिछले महीने भी दो बार सीबीआई के सामने पेश हुए थे। वकील ने कहा कि दो अन्य तारीखों (23 और 25 दिसंबर) को वह पेश नहीं हो सके क्योंकि 23 दिसंबर को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पहले ही समन भेजा जा चुका था।

अधिवक्ता लड्डा ने कहा, "सीबीआई दो दिनों तक पेश नहीं होने को असहयोग बता रही है। सीबीआई ने 25 दिसंबर को धूत को नोटिस जारी किया। वह 26 दिसंबर को पेश हुए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

सीबीआई के वकील राजा ठाकरे ने कहा कि धूत को दिसंबर 2022 में समन किया गया था ताकि आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर के साथ उनका सामना किया जा सके। उन्हें और उनके पति दीपक कोचर 23 दिसम्बर को गिरफ्तार किया गया था।  सीबीआई ने कहा, ‘ लेकिन जैसे ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो जाता है और वे एक-दूसरे पर उंगलियां उठाना शुरू कर देते हैं।’

उन्होंने कहा कि सीबीआई तीनों आरोपियों को पूछताछ के लिए साथ लाना चाहती है। ठाकरे ने कहा, "समन किए जाने के बावजूद उन्होंने (धूत ने) पेश होने से इनकार कर दिया। उस समय सीबीआई के पास कुछ समय के लिए कोचर परिवार की हिरासत थी और इसलिए धूत के साथ उनका आमना-सामना कराना चाहती थी।’ 

जब हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या धूत की गिरफ्तारी के बाद तीनों से एक साथ पूछताछ की गई तो ठाकरे ने कहा कि उनसे 26 और 27 दिसंबर को एक साथ पूछताछ की गई थी। 

लेकिन धूत के वकील ने कहा कि यह सच नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उद्योगपति को कभी भी कोचर परिवार के साथ नहीं बिठाया गया और गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ नहीं की गई। ठाकरे ने आगे कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी आरोपी को गिरफ्तार करने में देरी हुई से गिरफ्तारी अवैध या अनुचित नहीं हो जाती।

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 लोन मामले में विश्वास भंग पर आईपीसी की धारा जोड़ सकते हैं जांच अधिकारी
मुंबई की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को वीडियोकॉन कर्ज धोखाधड़ी मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा जोड़ने की अनुमति दी। इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके व्यवसायी पति आरोपी हैं। सीबीआई अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जांच अधिकारी अदालत की अनुमति के बिना जांच के दौरान धाराएं जोड़ या हटा सकता है।

पिछले महीने चंदा कोचर की गिरफ्तारी के बाद, सीबीआई ने उनके खिलाफ मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409 जोड़ने की मांग करते हुए विशेष अदालत का रुख किया था। यह धारा लोक सेवक या बैंकर द्वारा आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है और इसके लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
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