एक तरफ देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ कोरोना से ठीक होने वाले मरीज इलाज में लगे पैसों की भरपाई करने में जुटे हैं। अब देश में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) और व्हाइट फंगस के मामले सामने आने से लोग और भी परेशान हो गए हैं। हालांकि इसको रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। निजी अस्पतालों में इलाज काफी महंगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ी है। हालांकि इरडा ने निर्देशानुसार इंश्योरेंस कंपनियां स्वास्थ्य बीमा में कोरोना के इलाज का खर्च शामिल कर रही हैं। लेकिन अब लोगों को इस बात की चिंता है कि ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस का उपचार भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कवरेज का हिस्सा है या नहीं।
पिछले कुछ दिनों में ही म्यूकोरमाइकोसिस ने हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। अभी तक हरियाणा, गुजरात, यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों ने इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया गया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि बीमा कंपनियों ने माना है कि ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कवरेज का हिस्सा हैं और मरीज इसका दावा कर सकते हैं। यानी पॉलिसी की शर्तों को ध्यान में रखते हुए आपको ब्लैक व व्हाइट फंगस के इलाज में हुए खर्च का क्लेम मिल जाएगा।
क्या है म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस?
अमेरिका के सीडीसी के मुताबिक, म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस एक दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है। लेकिन ये गंभीर इंफेक्शन है, जो मोल्ड्स या फंगी के एक समूह की वजह से होता है। ये मोल्ड्स पूरे पर्यावरण में जीवित रहते हैं। ये साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है।
महामारी घोषित होने पर गाइडलाइंस का करना होता है पालन
बता दें कि जो राज्य किसी बीमारी को महामारी घोषित कर देते हैं फिर उन्हें केस, इलाज, दवा और बीमारी से होने वाली मौत का हिसाब रखना होता है। साथ ही सभी मामलों की रिपोर्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर को देनी होती है। इसके अलावा केंद्र सरकार और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर की गाइडलाइंस का पालन करना होता है।
जानिए इसके लक्षण क्या हैं?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने ट्वीट कर बताया है कि आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, खांसी, सिर दर्द, सांस लेने में तकलीफ, साफ-साफ दिखाई नहीं देना, उल्टी में खून आना या मानसिक स्थिति में बदलाव ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं।