एनआरआई के लिए चल रही विशेष जमा योजना से सरकारी बैंक जुटा सकते हैं 30 अरब डॉलर
नई दिल्ली। ईरान संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और रुपये को सहारा देने की रणनीति के तहत आरबीआई की ओर से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए विशेष एफसीएनआर(बी) जमा योजना शुरू करने का अच्छा परिणाम दिख रहा है। योजना के तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर (बी) जमा पर उच्च ब्याज दरों की पेशकश कर रहे हैं।
भारतीय सरकारी बैंकों ने अनुमान जताया है कि इस सीमित अवधि की विशेष जमा योजना के जरिये करीब 30 अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, यह अनुमान इस सप्ताह की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्रालय के अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सरकारी बैंकों के प्रमुखों ने जताया है। मामले से जुड़े एक सरकारी बैंक अधिकारी ने कहा, सरकारी बैंकों ने इस योजना अवधि के दौरान डॉलर की उस मात्रा का अनुमान दिया है, जिसे वे जुटाने में सक्षम होंगे। बड़े बैंकों ने लगभग 4-5 अरब डॉलर के प्रवाह का अनुमान लगाया है, जबकि छोटे बैंक एक-दो अरब डॉलर का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। n बोनस डेस्क
70-80 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है रकम
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के सिंगापुर चैप्टर के चेयरमैन संजय गट्टानी ने कहा, 30 सितंबर, 2026 तक खुली एफसीएनआर पहल के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं। यह रकम 70-80 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बिनोद कुमार ने कहा, शुरुआत धीमी रही है, लेकिन हमें भरोसा है कि सितंबर तक योजना के तहत 2 अरब डॉलर जुटा लेंगे।
म्यूचुअल फंड: महीनों तक लटकने वाले क्लेम को निपटाने के लिए एम्फी लेकर आया नए नियम
दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग, पुराने पते या बदलते हस्ताक्षर के मिसमैच के कारण शोक संतप्त और पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए म्यूचुअल फंड उद्योग की शीर्ष संस्था एम्फी ने मृत निवेशकों के फंड को उनके नॉमिनी या कानूनी वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बना दिया है। एम्फी की ओर से जारी संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू हो गई है।
पते का मिसमैच अब रोड़ा नहीं?
कई बार ऐसा होता था कि निवेशक ने जब 10-15 साल पहले म्यूचुअल फंड खरीदा था, तब उसका पता कुछ और था एवं मृत्यु के समय उसका स्थायी पता बदल चुका था। रिकॉर्ड में दर्ज पुराने पते और मृत्यु प्रमाण पत्र या नॉमिनी के दस्तावेजों में दर्ज नए पते में अंतर होने के कारण फंड कंपनियां क्लेम रोक देती थीं। एम्फी ने साफ निर्देश दिया है कि अगर मृत यूनिटधारक के पुराने रिकॉर्ड और नए दस्तावेजों के पते में कोई मिसमैच है, तो फंड कंपनियां निवेशक के नवीनतम उपलब्ध पते को ही सही मानेंगी। इसके लिए नॉमिनी को उस नए पते से जुड़े वैध और प्रासंगिक दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड, बिजली बिल आदि) सबूत के तौर पर देने होंगे।
बुजुर्गों के हस्ताक्षर बदल जाना या पैन कार्ड, डेथ सर्टिफिकेट और म्यूचुअल फंड फोलियो में नाम की स्पेलिंग (जैसे...कुमार या कुमारी, सरनेम आदि) में मामूली अंतर होना आम बात है। इन छोटी मानवीय गलतियों के कारण एसेट मैनेजमेंट कंपनियां नॉमिनी को हफ्तों चक्कर कटवाती थीं।इस प्रशासनिक बाधा को जड़ से खत्म करने के लिए एम्फी ने एक सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। अब सभी म्यूचुअल फंड कंपनियां नाम और हस्ताक्षर की विसंगतियों को दूर करने के लिए बाजार नियामक सेबी के 6 फरवरी, 2026 के मास्टर सर्कुलर के तहत तय नियमों का पालन करेंगी। इसके तहत मामूली और बड़े विसंगति को वर्गीकृत करके आरटीए के जरिये तुरंत हल किया जाएगा, जिससे क्लेम अटकेंगे नहीं।