कतर पर मिसाइल हमलों से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित
कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा झटका दिया है। इन हमलों के कारण कतर की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है।
कतरएनर्जी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 18 मार्च और 19 मार्च 2026 की शुरुआती घंटों में हुए हमलों से प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। कंपनी के अनुसार, इस घटना से सालाना करीब 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
ऊर्जा मामलों के राज्यमंत्री और कतरएनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मिसाइल हमलों के चलते कतर की LNG निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई है और लगभग 20 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व का नुकसान हुआ है। उत्पादन सुविधाओं को हुए व्यापक नुकसान की मरम्मत में पांच साल तक का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्थिति के चलते कंपनी को कुछ LNG अनुबंधों पर दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।
एस्सार समूह की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स को 10 अरब डॉलर तक का समर्थन
अमेरिका ने मिनेसोटा में एक बड़े खनिज और मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट के लिए एस्सार समूह की कंपनी मेसाबी मेटालिक्स को 10 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। यह ऐलान यूएस एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) ने टोक्यो में आयोजित इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी मिनिस्ट्रियल और बिजनेस फोरम के दौरान किया। EXIM के मुताबिक, यह फंडिंग करीब 30 अरब डॉलर के रणनीतिक सौदों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक सहयोगियों के साथ मिलकर अमेरिका की सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
फोरम में EXIM के प्रेसिडेंट और चेयरमैन जॉन जोवानोविक के साथ इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के एडमिनिस्ट्रेटर ली जेल्डिन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मेसाबी मेटालिक्स मिनेसोटा में एक इंटीग्रेटेड आयरन ओर माइनिंग और प्रोसेसिंग सुविधा विकसित कर रही है, जो सालाना करीब 70 लाख टन हाई-ग्रेड डायरेक्ट-रिडक्शन आयरन ओर पेलेट्स का उत्पादन करेगी। ये आधुनिक स्टील निर्माण के लिए अहम कच्चा माल हैं। इस परियोजना से अमेरिका में सैकड़ों रोजगार भी सृजित होने की उम्मीद है।
CMPDI IPO खुला: मामूली 2% लिस्टिंग संकेत, ₹1,842 करोड़ का OFS इश्यू
कोल इंडिया की सहायक कंपनी सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDI) का आईपीओ आज यानी 20 मार्च से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के आधार पर इस इश्यू की लिस्टिंग में करीब 2% का हल्का प्रीमियम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो बाजार में स्थिर लेकिन उत्साहहीन शुरुआत का संकेत देता है।
कंपनी ने इस आईपीओ के लिए प्राइस बैंड ₹163 से ₹172 प्रति शेयर तय किया है। यह इश्यू पूरी तरह ₹1,842 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसका मतलब है कि इस आईपीओ से मिलने वाली राशि कंपनी को नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी।
बाजार जानकारों के मुताबिक, CMPDI का आईपीओ निवेशकों को एक स्थिर लेकिन सीमित लिस्टिंग गेन का अवसर दे सकता है, जबकि लंबी अवधि के निवेश के लिए कंपनी के फंडामेंटल्स और कोल सेक्टर की मांग पर नजर रखना अहम होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने एचएसबीसी पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एचएसबीसी) पर 31.8 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई निष्क्रिय खातों और लावारिस जमा से संबंधित कुछ निर्देशों का पालन न करने के कारण की गई है। आरबीआई ने शुक्रवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
आरबीआई ने बताया कि बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में 31 मार्च, 2025 तक एक वैधानिक निरीक्षण किया गया था। पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर, जिसमें आरबीआई के निर्देशों के प्रावधानों का पालन न करना पाया गया, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था। बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दिए गए मौखिक बयानों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने पाया कि बैंक के खिलाफ आरोप सही थे। इसके बाद मौद्रिक जुर्माना लगाना उचित समझा गया। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह जुर्माना वैधानिक और नियामक अनुपालन में पाई गई कमियों पर आधारित है।
आरबीआई ने कहा कि बैंक ने अपनी वेबसाइट पर लावारिस जमा का एक खोज योग्य डेटाबेस उपलब्ध नहीं कराया था। यह केंद्रीय बैंक के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, 'जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता' (डीईए) कोष में स्थानांतरित कुछ लावारिस जमाओं के लिए बैंक ने 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स रेफरेंस नंबर' (यूडीआरएन) भी उत्पन्न और आवंटित नहीं किया था। इन कमियों के कारण ही बैंक पर यह कार्रवाई की गई है।
आरबीआई ने जोर देकर कहा कि यह जुर्माना केवल नियामक अनुपालन में पाई गई कमियों के लिए है। इसका उद्देश्य हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉर्पोरेशन द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई राय देना नहीं है। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मौद्रिक जुर्माने के बावजूद, आरबीआई बैंक के खिलाफ कोई अन्य कार्रवाई शुरू करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। यह कार्रवाई भविष्य में भी की जा सकती है।