पश्चिम एशिया तनाव का असर, FAR बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय बॉन्ड बाजार पर भी दिखने लगा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने पूर्णतः सुलभ मार्ग (एफएआर) के तहत उपलब्ध सरकारी प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी घटा दी है। क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) के आंकड़ों के अनुसार, एफएआर सरकारी बॉन्ड में एफपीआई निवेश घटकर मंगलवार तक करीब 3.26 लाख करोड़ रुपये रह गया है, जो 27 फरवरी को लगभग 3.31 लाख करोड़ रुपये था। यानी संघर्ष शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने करीब 4,634 करोड़ रुपये की निकासी की है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपये में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। इन कारणों से उभरते बाजारों में निवेश को लेकर वैश्विक निवेशक सतर्क हो गए हैं। इसी वजह से विदेशी निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड, खासकर FAR श्रेणी की प्रतिभूतियों में अपनी हिस्सेदारी घटानी शुरू कर दी है।