पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर, तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि क्षेत्र में जारी तनाव भारत के लिए ऊर्जा लागत और बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष कई देशों से जुड़ा हुआ है और इसका आर्थिक प्रभाव उम्मीद से अधिक गंभीर हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 65-70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका कारण क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को हुआ नुकसान बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने और कतर से एलएनजी आपूर्ति रुकने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। इसके चलते प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक यदि संघर्ष जारी रहता है तो 2026 में एलएनजी उत्पादन में भी बड़ा नुकसान हो सकता है। अनुमान है कि दो सप्ताह में करीब 3.30 मिलियन टन और यदि युद्ध एक महीने या उससे अधिक चला तो करीब 11.20 मिलियन टन तक एलएनजी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।