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Biz Updates: देश में बढ़ी बिजली की खपत, फरवरी में 2% बढ़कर 133 अरब यूनिट; पढ़ें कारोबार जगत की अहम खबरें

Tue, 10 Mar 2026 11:49 AM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिजनेस अपडेट - फोटो : अमर उजाला
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देश में बिजली की मांग फरवरी में लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 133 अरब यूनिट (BU) पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी महीने के 131 अरब यूनिट की तुलना में अधिक है। यह फरवरी महीने के लिए कम से कम 2010 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, कई हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम और अधिकतम तापमान दर्ज होने के कारण कूलिंग की जरूरत बढ़ी, जिससे बिजली की खपत में इजाफा हुआ।

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रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में देश की बिजली मांग सालाना आधार पर 1 से 1.5 प्रतिशत बढ़कर 1,705 से 1,715 अरब यूनिट के बीच रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सर्दी, वित्त वर्ष के अंत में सामान्य से अधिक तापमान की शुरुआत और स्थिर आर्थिक वृद्धि बिजली मांग को बढ़ावा दे सकती है, हालांकि लंबे मॉनसून के कारण इस वृद्धि पर कुछ असर पड़ सकता है।

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पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर, तेल 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि क्षेत्र में जारी तनाव भारत के लिए ऊर्जा लागत और बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष कई देशों से जुड़ा हुआ है और इसका आर्थिक प्रभाव उम्मीद से अधिक गंभीर हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर जताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 65-70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका कारण क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को हुआ नुकसान बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जबकि होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने और कतर से एलएनजी आपूर्ति रुकने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। इसके चलते प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक यदि संघर्ष जारी रहता है तो 2026 में एलएनजी उत्पादन में भी बड़ा नुकसान हो सकता है। अनुमान है कि दो सप्ताह में करीब 3.30 मिलियन टन और यदि युद्ध एक महीने या उससे अधिक चला तो करीब 11.20 मिलियन टन तक एलएनजी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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