केंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत खेतों के बाहर हरित क्षेत्र बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन को कम करने के उद्देश्य से कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए आदर्श नियम लाए गए हैं। इससे एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एग्रोफोरेस्ट्री यानी कृषि वानिकी, ऐसी प्रणाली है जिसमें एक ही जमीन पर पेड़ और फसलें या जानवर एक साथ उगाए जाते हैं। इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और पर्यावरण भी बेहतर होगा।
सरकार लंबे समय से कृषि वानिकी को बढ़ावा दे रही है ताकि किसानों की आय दुगनी की जा सके, जंगलों के बाहर वृक्षों की संख्या बढ़े, जलवायु परिवर्तन को कम किया जा सके, लकड़ी का आयात घटे, और भूमि उपयोग अधिक टिकाऊ बने। यह पहल पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को भी समर्थन देती है।
मंत्रालय के अनुसार कृषि भूमी पर पेड़ काटने के लिए स्पष्ट और एक समान नियमों की कमी अब तक किसानों के लिए एक बड़ी बाधा रही है। यह कृषि वानिकी उत्पादों की खेती और विपणन को प्रभावित करता है।
नए नियमों के अनुसार, लकड़ी आधारित उद्योग (स्थापना एवं विनियमन) दिशा-निर्देश, 2016 के तहत पहले से बनी राज्य स्तरीय समिति (एसएलसी) ही इन नियमों के लिए समिति का काम करेगी। इसमें अब राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। यह समिति राज्य सरकार को कृषि वानिकी के नियम सरल बनाने और खेतों से वाणिज्यिक मूल्य वाले पेड़ों की कटाई और परिवहन के लिए सलाह देगी।
आवेदकों को अपनी कृषि भूमि को शनल टिंबर मैनेजमेंट सिस्टम (NTMS ) पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा। उन्हें भूमि स्वामित्व और स्थान से संबंधित जानकारी देनी होगी। साथ ही, उन्हें लगाए गए पौधों की संख्या, प्रजाति, रोपण तिथि और औसत ऊंचाई जैसी जानकारी भी अपलोड करनी होगी। आवेदकों को एसएलसी द्वारा अपेक्षित जानकारी भी अपडेट करनी होगी। हर पेड़ की जियोटैग तस्वीर केएमएल (KML) फॉर्मेट में पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इन जानकारियों की निगरानी वन, कृषि और पंचायती राज विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों करेंगे।
अगर किसी किसान की भूमि पर 10 से अधिक पेड़ हैं और वह उन्हें काटना चाहता है, तो उसे एनटीएमएस पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके बाद एक सत्यापन एजेंसी फील्ड विजिट करेगी और जमीन, पेड़ों और लकड़ी की अनुमानित मात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ एक रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके आधार पर कटाई की अनुमति दी जाएगी।
10 पेड़ों तक की कटाई के लिए आवेदन करने के लिए, आवेदकों को पेड़ों की तस्वीरें NTMS पर अपलोड करनी होंगी। सिस्टम पेड़ के आकार (परिधि, ऊंचाई), उपज और प्रजाति का अनुमान लगाएगा। आवेदकों को नियोजित कटाई की तारीख की भी जानकारी देनी होगी। कटाई के बाद, उन्हें स्टंप की तस्वीरें अपलोड करनी होंगी। संबंधित विभाग सत्यापन के लिए अधिकारी भी भेज सकता है। ऐसी स्थिति में फेलिंग की अनुमति अपने आप पोर्टल से जारी हो जाएगी। प्रभागीय वन अधिकारी इस बात की निगरानी करेंगे कि सत्यापन एजेंसियां कैसे काम कर रही हैं। वे इन एजेंसियों के प्रदर्शन पर हर तिमाही में एसएलसी को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।