अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने जाते-जाते एच-1बी वीजा के नियमों में ढील देने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करना आसान हो जाएगा। बाइडन प्रशासन के इस निर्णय के बाद एफ-1 छात्र वीजा से एच-1बी वीजा में आसानी से बदलाव हो सकेगा। बाइडन सरकार के इस कदम से हजारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों को लाभ मिलने की संभावना है। अमेरिका में इन दिनों सत्ता हस्तांकरण की प्रक्रिया चल रही है। नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने वाले हैं।
एच-1बी वीजा सबसे अधिक मांग वाला एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर करती हैं। ऐसे में भारतीय आईटी पेशेवरों को बाइडन प्रशासन के इस फैसले से लाभ मिल सकता है।
मंगलवार को होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की ओर से घोषित इस नियम का उद्देश्य विशेष पदों और गैर-लाभकारी व सरकारी अनुसंधान संगठनों के लिए नियमों को आधुनिक बनाकर नियोक्ताओं और श्रमिकों को अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इन संगठनों के लिए एच-1बी वीजा की सीमाओं में छूट दी गई है।
डीएचएस के अनुसार, यह नियम वैसे एफ-1 वीजाधारक छात्रों के लिए लचीलापन लाएगा, जो अपनी स्थिति को एच-1बी में बदलना चाहते हैं। इससे अमेरिकी नागरिकता व आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) को उन अधिकांश व्यक्तियों के आवेदनों पर अधिक तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी, जिन्हें पहले एच1-बी वीजा के लिए मंजूरी मिल चुकी थी।
होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव एलेजांद्रो एन मयोरकास ने कहा, "अमेरिकी व्यवसाय उच्च कुशल प्रतिभाओं की भर्ती के लिए एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं, जिससे देश भर के समुदायों को लाभ मिल रहा है।" उन्होंने कहा, "कार्यक्रम में ये सुधार नियोक्ताओं को वैश्विक प्रतिभाओं को नियुक्त करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करेगा, यह हमारी आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा और उच्च कुशल श्रमिकों को नियुक्त करने में मदद करेगा।
यूएससीआईएस के निदेशक उर एम. जादौ ने कहा, "एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 में कांग्रेस की ओर से बनाया गया था और इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए इसे आधुनिक बनाने की जरूरत थी।"