भारती एयरटेल की अनुषंगी कंपनी इंडो टेलीपोर्ट्स ने घरेलू एवं विदेशी विमानों में उड़ान के दौरान कॉलिंग और डाटा सेवाएं (इन-फ्लाइट कनेक्टिविटी) देने के लाइसेंस के लिए दूरसंचार विभाग के पास आवेदन किया है। सूत्रों के मुताबिक, आवेदन अभी विचाराधीन है। हालांकि, एयरटेल ने इस संबंध में अभी कोई टिप्पणी नहीं की है।
दरअसल, सरकार ने देश में इन-फ्लाइट एंड मैरीटाइम कनेक्टिविटी (आईएफएमसी) लाइसेंस के संबंध में पिछले साल दिसंबर में अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद पिछले महीने ह्यूज्स कम्युनिकेशन इंडिया (एचसीआईएल) देश में आईएफएमसी लाइसेंस पाने वाली पहली कंपनी बनी।
इसके अलावा नील्को की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी टाटानेट सर्विसेज ने भी 6 मार्च को इसका लाइसेंस मिलने की घोषणा की है। नील्को ने एक बयान में कहा कि आईएफएमसी लाइसेंस से सेटेलाइट प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए भारत में विमानों, जहाजों और क्रूज लाइनरों आदि में यात्रा के दौरान निर्बाध कॉलिंग, डाटा और वीडियो सेवाएं मिलनी संभव हो जाएंगी।
23,000 से अधिक विमानों में मिलेगी सुविधा
यूरोकॉन्सूलेट के मुताबिक, 2027 तक 23,000 से अधिक वाणिज्यिक विमान अपने यात्रियों को यह सुविधा देने लगेंगे। 2017 तक 7,400 विमान ही यह सुविधा दे रहे थे। नॉर्दर्न स्काई रिसर्च की एयरोनॉटिकल सैटकॉम मार्केट-2017 नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 के अंत तक हर तीन में से एक वाणिज्यिक विमान में वीएसएटी (वेरी स्मॉल एपर्चर टर्मिनल) कनेक्टिविटी स्थापित की जाएगी।