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अब नौकरी से ही नहीं: ट्रेडिंग-फ्रीलांसिंग से भी कमा रहे भारतीय, चार साल में पांच गुना बढ़े ऐसे करदाता

Tue, 03 Nov 2026 06:50 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

नौकरी के अलावा ट्रेडिंग, कारोबार, फ्रीलांसिंग और क्रिप्टोकरेंसी जैसे माध्यमों से कमाई करने वाले भारतीय करदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। क्लियरटैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 में 47.3% करदाताओं ने वेतन के अलावा अन्य स्रोतों से आय दर्ज की, जबकि चार साल पहले यह आंकड़ा 9.5% था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीयों के लिए नौकरी ही कमाई का एकमात्र जरिया नहीं रह गया है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग, कारोबार, फ्रीलांसिंग और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जैसे साधनों से कमाई भी करदाताओं के आयकर रिटर्न फॉर्म में तेजी से जगह बना रही है।

चार साल में पांच गुना बढ़ा आंकड़ा

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क्लियरटैक्स की सालाना रिपोर्ट 'हाउ इंडिया फाइल्ड इन 2026' के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 में खुद रिटर्न भरने वाले 47.3% करदाताओं ने नौकरी के अलावा कम से कम एक अन्य स्रोत से आय दर्ज की, जबकि आकलन वर्ष 2022-23 में यह अनुपात सिर्फ 9.5% था। यानी चार साल में ऐसे करदाताओं का हिस्सा करीब पांच गुना बढ़ा है। सिर्फ दूसरे साधनों से कमाने वालों की संख्या में वृदि्ध के साथ एक से अधिक गैर-वेतन स्रोतों से कमाई करने वालों का अनुपात भी बढ़ा है। आकलन वर्ष 2022-23 में 3.5% करदाताओं ने दो या अधिक गैर-वेतन साधनों से कमाई की थी। यह हिस्सा 2026-27 में 24.4% पहुंच गया। यानी अब हर चार में से एक करदाता कमाई के कम से कम दो गैर-वेतन स्रोतों की जानकारी दे रहा है। ब्यूरो

आयकर रिटर्न का भी बदला स्वरूप
आय साधन बदलने का असर आयकर रिटर्न (आईटीआर) के स्वरूप पर भी पड़ा है। अब अधिक करदाताओं को ऐसे रिटर्न फॉर्म भरने पड़ रहे हैं, जिनमें निवेश से लाभ, कारोबार से आय व दूसरे वित्तीय लेनदेन की सूचना देनी होती है।

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आईटीआर-1 से इतर फॉर्म भरने वाले बढ़े
क्लियरटैक्स पर आकलन वर्ष 2026-27 में 62 फीसदी आईटीआर ऐसे थे, जो सामान्य वेतनभोगी करदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आईटीआर-1 के बजाय दूसरे फॉर्म में भरे गए। दो साल पहले आकलन वर्ष 2024-25 में यह हिस्सेदारी 40 फीसदी थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी करदाताओं की आय का स्वरूप इसी अनुपात में बदल गया है।

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