कोविड में ऑटो सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट रही। लोगों ने अपनी नौकरियां खोईं, साथ ही सेविंग भी समाप्त हुईं। इससे ऑटो मार्केट पर बहुत बुरा असर पड़ा। हालांकि कोविड से उबरने के बाद अब ऑटो बाजार ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। कोविड के बाद थोड़ा समय लगा पर बाजार के दिन बदलने लगे। बाजार को सामान्य स्थिति में लाने में सरकार द्वारा पेश की गईं योजनाओं और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान देते हुए कृषि उत्पादों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने का बड़ा योगदान रहा। जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में पैसो का प्रवाह बढ़ा और लोगों की सेविंग बढ़ने लगी। इस कारण ऑटो सेक्टर विशेषकर दोपहिया सेगमेंट ने रफ्तार पकड़ी। ग्रामीण इलाकों में जहां ट्रांसपोर्टेशन की काफी समस्या होती है। इसलिए वहां दोपहिया वाहनों की मांग अच्छी रहती है। इसकी वजह से इस सेगमेंट में पिछले साल सितंबर महीने से मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है।
रिकॉर्ड बिक्री की वजह
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष राज सिंघानिया ने बताया कि पिछले साल सितंबर महीने से अभी तक ऑटो सेक्टर ने मजबूत ग्रोथ के साथ रिकार्ड बिक्री देखी है। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा एमएसपी और ग्रामीण इलाकों साथ ही शहरी क्षेत्रों के लिए विशेष स्कीम पेश करना रहा। इस वजह से उनके पास बचत शुरू हुई और ऑटो सेक्टर में अच्छी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। सालाना आधार पर 2024 अप्रैल में दो पहिया वाहनों की ग्रोथ 33 प्रतिशत रही। तीन पहिया की 9 प्रतिशत, यात्री वाहन की 16 प्रतिशत और कमर्शियल वाहनों की ग्रोथ 2 प्रतिशत देखी गई।
दोपहिया वाहनों में आगामी दिनों में रिकार्ड बिक्री रहेगी जारी
वे कहते हैं कि दोपहिया वाहनों की सबसे अधिक मांग ग्रामीण और छोटे शहरों से आती है। इन इलाकों में ट्रांसर्पोटेशन की परेशानी अधिक है, इसलिए दोपहिया वाहनों की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है।अप्रैल में दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन 33 परसेंट बढ़कर 16,43,510 यूनिट हो गया, जबकि अप्रैल 2023 में यह 12,33,763 यूनिट था। मई में गर्मी अधिक पड़ने और शादी ब्याह के मर्हूत न होने की वजह से बिक्री में थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन यह हर साल मई में होता है।
पैसेंजर व्हीकल में मॉडल्स की बेहतर उपलब्धता
पैसेंजर व्हीकल में सालाना आधार पर दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई, जिसे मॉडल्स की बेहतर उपलब्धता और अनुकूल बाजार भावनाओं (विशेष रूप से नवरात्रि और गुड़ी पड़वा जैसे त्यौहारों के आसपास) को समर्थन मिला। निर्माता कंपनियां अपनी बिक्री को बढ़ाने के लिए नए-नए फिचर के मॉडल्स पेश कर रहे हैं। ग्राहक भी पहले की तुलना नए फिचर अपडेग्रेशन और नए मॉडल्स को पसंद कर रहे हैं। इसलिए इस कैटेगरी में बिक्री बढ़ रही है और भविष्य में यह कैटेगरी वृद्धि दर्ज करेगी।
एसयूवी का चलन
कोविड से पहले और बाद में स्पोर्टस यूटिलटी व्हीकल्स (एसयूवी) को सबसे अधिक पसंद किया जाता रहा है। विशेषकर युवा और परिवार के लिए एक संपूर्ण कार है। सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर ग्राहक इसे खरीदना पसंद करते हैं। कंपिनयां नए फीचर वाले मॉडल्स पेश कर रही हैं। फाडा के अनुसार एसयूवी का मार्केट हिस्सेदारी 50 प्रतिशत की है और यह कैटेगरी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
भारतीय ऑटो बाजार में कई विकल्प
उन्होंने बताया कि देश का ऑटो सेक्टर काफी तेजी से ग्रोथ कर रहा है। इसकी वजह यह है कि भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), पेट्रोल-डीजल सहित सीएनजी और हाइड्रोलिक कई विकल्प हैं। जहां ग्राहक अपनी सुविधा और आवश्यकतानुसार कार, बाइक, स्कूटर और वाहनों की खरीद रहे हैं। इसलिए ऑटो की रिकॉर्ड बिक्री का सफर आगे भी जारी रहेगा।
ईवी सेगमेंट को अभी भी सहयोग की दरकार
बीते कुछ सालों में भारतीय ग्राहकों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कार की मांग में तेजी देखी जा रही है। इस क्रम में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के साथ कार की बिक्री बढ़ी है। लेकिन फेम 2 के तहत सब्सिडी समाप्त करने के बाद इसमें बिक्री में गिरावट आई है। अप्रैल 2024 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर 53.34 में गिरावट देखी गई।
इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सेगमेंट को देश में अभी भी सरकार के सहयोग की जरूरत है। फेम 2 के तहत सब्सिडी समाप्त करने के बाद इसमें बिक्री में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि सब्सिडी वापस लेने के बाद ईवी के दामों में वृद्धि हुई और बिक्री पर असर पड़ा। बावजूद इसके इस सेगमेंट को सहयोग देने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक मोब्लिटी प्रमोश स्कीम चला रही है। यह 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2024 तक लागू रहेगी। इसके तहत दोपहिया वाहनों पर 22,500 से 10,000 रुपये और पैसेंजर वाहनों पर डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर 5.4 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी रखता है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर वाहन की मांग में इजाफा देखने को मिला है। सालाना आधार पर 56.43 प्रतिशत की बिक्री के साथ ही यह सेगमेंट 54.3 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी रखता है। वे कहते हैं यह अभी शुरुआत है इस सेगमेंट को बढ़ाने के लिए चुनावों के बाद फेम3 लाने की जरूरत है। इसे वर्ष 2026-27 तक सरकार की सहायता की जरूरत है। इसके बाद ही ईवी की हिस्सेदारी मजबूत होगी।
सामने आईं कुछ चुनौतियां
फाडा की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। अप्रैल 2024 में चुनावों का असर भी देखने को मिला। साथ ही सीमित आर्थिक विकल्पों और गर्मी की अधिकता ने भी वाहनों की बिक्री में चुनौतियां डाली। रिर्पोट के अनुसार वाहनों की बिक्री पर कई तरह के मार्केट फैक्टर हावी रहे हैं। इस दौरान मार्केट का सेंटीमेंट काफी पॉजिटिव रहा। इसमें फ्यूल की कीमत पॉजिटिव रही। इसके साथ ही फेस्टिव सीजन और शादी के सीजन ने भी प्रभावित किया। इसके साथ ही नए मॉडल्स की लॉन्च और यात्री वाहनों की सप्लाई में देरी भी एक बड़ी वजह रही।